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सुप्रीम कोर्ट ने 2023 नियम बरकरार रखते हुए भी तेलंगाना जिला न्यायाधीश नियुक्तियों का रास्ता साफ किया, आदेश केवल इस मामले तक सीमित

सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाई कोर्ट को निर्देश दिया कि जिला जज उम्मीदवारों की नियुक्ति अपवादस्वरूप हो, 2023 नियम जस के तस रहें।

Vivek G.
सुप्रीम कोर्ट ने 2023 नियम बरकरार रखते हुए भी तेलंगाना जिला न्यायाधीश नियुक्तियों का रास्ता साफ किया, आदेश केवल इस मामले तक सीमित

नई दिल्ली, 26 सितम्बर: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राहत भरा फैसला सुनाते हुए तेलंगाना हाई कोर्ट को निर्देश दिया कि जिन उम्मीदवारों के आवेदन नए राज्य नियमों के तहत पहले खारिज कर दिए गए थे, उनके परिणाम घोषित कर नियुक्ति पत्र जारी किए जाएं। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने ज़ोर देकर कहा कि यह निर्णय “विशेष मामला” है और कोई नज़ीर नहीं बनेगा।

पृष्ठभूमि

विवाद तब शुरू हुआ जब जून 2023 में तेलंगाना सरकार ने नई न्यायिक सेवा नियमावली जारी की। इन नियमों में ज़िला जज पद के आवेदकों के लिए शर्त रखी गई कि उनके पास तेलंगाना हाई कोर्ट या उसके अधीनस्थ न्यायालयों में कम से कम सात साल का अभ्यास होना चाहिए।

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उषा किरण क्षत्री सहित कई अधिवक्ताओं ने 2017 के पुराने नियमों के तहत आवेदन किया था और लिखित परीक्षा भी पास की थी। लेकिन उनका आवेदन इसलिए खारिज कर दिया गया क्योंकि वे विशेष रूप से तेलंगाना में प्रैक्टिस नहीं कर रहे थे, भले ही उनके पास अन्यत्र आवश्यक अनुभव था।

नाराज़ होकर समूह ने हाई कोर्ट का रुख किया। हाई कोर्ट ने अंतरिम आदेश से उन्हें लिखित परीक्षा देने की अनुमति तो दी, लेकिन अंततः दिसंबर 2023 में याचिकाएँ खारिज कर दीं। अदालत ने कहा कि 2023 के नियम वैध हैं और पिछली तारीख से लागू होते हैं।

अदालत की टिप्पणियाँ

संयुक्त अपीलों और संबंधित रिट याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने समयरेखा की विशेष स्थिति पर ध्यान दिया। उम्मीदवारों ने आवेदन तो पुराने नियमों के तहत किया था, लेकिन उन्हें सख्त नए मानकों से आंका गया। बहस के दौरान पीठ ने एक मध्यम मार्ग सुझाया।

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न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा, “हमने व्यावहारिक विकल्प सुझाया-इन उम्मीदवारों पर विचार करें, बिना 2023 के नियमों को छेड़े-यदि हाई कोर्ट सहमत हो।” आंतरिक चर्चा के बाद हाई कोर्ट ने बताया कि योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति पर उसे “कोई आपत्ति नहीं” है, बशर्ते इसे अपवादस्वरूप माना जाए।

अदालत ने इस सहयोगी रुख की सराहना की और माना कि दोनों पक्षों ने कई पुराने फैसलों का हवाला दिया, लेकिन इस मामले में सहमति का रास्ता ज्यादा उपयुक्त है।

निर्णय

तेलंगाना हाई कोर्ट की सहमति स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी योग्य अपीलकर्ताओं और हस्तक्षेपकर्ताओं के परिणाम घोषित कर उनकी पात्रता की जांच की जाए। जो उपयुक्त पाए जाएं, उन्हें दो महीने के भीतर नियुक्ति पत्र जारी किए जाएं।

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आदेश में स्पष्ट किया गया कि नए नियुक्त न्यायाधीश पिछला वेतन नहीं मांग सकेंगे और उनकी वरिष्ठता उनके वास्तविक नियुक्ति दिनांक से मानी जाएगी, यानी पहले से नियुक्त न्यायाधीश उनसे वरिष्ठ रहेंगे। अहम बात यह कि पीठ ने जोड़ा, “यह आदेश केवल इन अपीलों और याचिकाओं की परिस्थितियों तक सीमित है और भविष्य के मामलों के लिए नज़ीर नहीं बनेगा।”

इसके साथ ही नागरिक अपीलें, विशेष अनुमति याचिकाएँ और संबंधित रिट याचिका निपटा दी गईं। सभी पक्षों को अपने-अपने खर्च खुद उठाने होंगे।

मामला: उषा किरण क्षत्री एवं अन्य बनाम तेलंगाना राज्य एवं अन्य

निर्णय तिथि: 26 सितंबर 2025

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