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सुप्रीम कोर्ट ने लक्ष्या सेन के खिलाफ उम्र जालसाजी मामले में जबरन कार्रवाई पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्या सेन के खिलाफ उम्र जालसाजी मामले में जबरन कार्रवाई पर रोक लगा दी है। कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर नोटिस जारी किया गया है। अगली सुनवाई 16 अप्रैल को होगी।

Shivam Y.
सुप्रीम कोर्ट ने लक्ष्या सेन के खिलाफ उम्र जालसाजी मामले में जबरन कार्रवाई पर लगाई रोक

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने 25 फरवरी को भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्या सेन द्वारा दायर एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर नोटिस जारी किया। यह याचिका कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती देती है जिसमें उनके खिलाफ चल रही जांच को रद्द करने की मांग खारिज कर दी गई थी।

न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और के. विनोद चंद्रन की पीठ ने इस मामले में नोटिस जारी किया और लक्ष्या सेन व अन्य के खिलाफ किसी भी प्रकार की जबरन कार्रवाई पर रोक लगा दी। इस मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल को होगी।

उम्र जालसाजी के आरोप

यह विवाद एक निजी शिकायतकर्ता नागराजा एम.जी. द्वारा दायर शिकायत से शुरू हुआ, जिसमें आरोप लगाया गया कि लक्ष्या सेन, उनके भाई चिराग सेन और उनके माता-पिता ने कर्नाटक बैडमिंटन एसोसिएशन के एक कोच के साथ मिलकर जन्म प्रमाण पत्र में हेरफेर किया।

आरोप है कि उनकी आधिकारिक उम्र लगभग ढाई साल कम दिखाकर उन्हें जूनियर बैडमिंटन टूर्नामेंट में भाग लेने और सरकारी लाभ प्राप्त करने की अनुमति दी गई।

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शिकायत आरटीआई अधिनियम के तहत प्राप्त जानकारी के आधार पर दायर की गई थी। इसमें यह भी कहा गया कि लक्ष्या सेन के पिता, जो प्रकाश पादुकोण बैडमिंटन अकादमी में कोच हैं, के खिलाफ विभागीय जांच की गई थी, जिसमें उन्हें दोषी पाया गया। इसके बाद अनुशासनात्मक प्राधिकारी ने इस निर्णय की पुष्टि की।

शिकायतकर्ता की मांग पर ट्रायल कोर्ट ने भारतीय खेल प्राधिकरण से मूल रिकॉर्ड की जांच करने के लिए बुलाया। इसके बाद, अदालत ने इस मामले की जांच के लिए पुलिस को सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत निर्देश दिया।

इसके परिणामस्वरूप, आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 468 (धोखाधड़ी के लिए जालसाजी), 471 (फर्जी दस्तावेजों का उपयोग), और 34 (सामान्य आशय) के तहत एफआईआर दर्ज की गई।

कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एम.जी. उमा ने 19 फरवरी को लक्ष्या सेन व अन्य की याचिका खारिज करते हुए कहा:

"जब रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्रियां प्रथम दृष्टया अपराध स्थापित करती हैं, तो मुझे जांच रोकने या आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने का कोई कारण नहीं दिखता। शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज आरटीआई अधिनियम के तहत संबंधित प्राधिकरण से प्राप्त किए गए हैं। ऐसे हालात में, मैं इन याचिकाओं को स्वीकार करने का कोई आधार नहीं देखता।"

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सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप

कर्नाटक उच्च न्यायालय के इस निर्णय को चुनौती देते हुए लक्ष्या सेन और उनकी कानूनी टीम ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता आर्यमान सुंदरम, अधिवक्ता बद्री विशाल, वरुण जोशी और आयुष नेगी ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी की। अधिवक्ता ऑन रिकॉर्ड (AOR) रोहिणी मूसा भी उनके पक्ष में उपस्थित हुईं।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की समीक्षा के बाद नोटिस जारी किया और अगले आदेश तक आरोपियों के खिलाफ किसी भी प्रकार की जबरन कार्रवाई पर रोक लगा दी। यह निर्णय लक्ष्या सेन और उनके परिवार को अस्थायी राहत प्रदान करता है क्योंकि कानूनी लड़ाई अभी जारी है।

शीर्षक: चिराग सेन और अन्य बनाम कर्नाटक राज्य और अन्य | डायरी संख्या: 9824-2025

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