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सुप्रीम कोर्ट ने ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न का केस किया खारिज, पति पर जारी रहेगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने ससुराल पक्ष के खिलाफ दहेज उत्पीड़न केस खारिज किया, लेकिन पति को 498-ए, 377, 506 में मुकदमे का सामना करना होगा।

Vivek G.
सुप्रीम कोर्ट ने ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न का केस किया खारिज, पति पर जारी रहेगी सुनवाई

शुक्रवार को सुनाए गए एक अहम फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने दहेज उत्पीड़न मामले में तीन परिजनों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही खत्म कर दी, लेकिन साफ किया कि शिकायतकर्ता का पति अब भी मुकदमे का सामना करेगा। 2022 से चल रहे इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए (दहेज के लिए क्रूरता), 377 (अप्राकृतिक यौन संबंध) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत आरोप लगे थे।

पृष्ठभूमि

मामला जुलाई 2021 का है, जब शिकायतकर्ता की शादी नागपुर निवासी पीयूष जैन से हुई। शादी के कुछ समय बाद ही उसने आरोप लगाया कि उसके पति का परिवार बार-बार तोहफे मांगता और उसे परेशान करता रहा। फरवरी 2022 में बजाज नगर पुलिस थाने, नागपुर में प्राथमिकी दर्ज हुई, जो शुरू में धारा 498-ए के तहत थी लेकिन बाद में इसमें अप्राकृतिक यौन संबंध और धमकी के आरोप भी जोड़ दिए गए।

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बॉम्बे हाईकोर्ट (नागपुर खंडपीठ) ने मामला खत्म करने से इनकार करते हुए कहा था कि मुकदमे के लिए पर्याप्त सामग्री है। इसके बाद ससुर, सास और ननद ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।

अदालत की टिप्पणियाँ

न्यायमूर्ति बी.आर. गवई, के. विनोद चंद्रन और अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने प्राथमिकी और अन्य सामग्री को बारीकी से परखा। फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति चंदुरकर ने कहा: “सामान्य और अस्पष्ट आरोपों के आधार पर प्रारंभिक मामला नहीं बन सकता। प्राथमिकी, यदि पूरे रूप में भी मानी जाए, तो भी इसमें अपीलकर्ताओं के खिलाफ क्रूरता के ठोस आरोप नहीं दिखते।”

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अदालत ने जोर देकर कहा कि धारा 498-ए के तहत मामला तभी टिक सकता है जब गंभीर नुकसान पहुंचाने या गैर-कानूनी मांग पूरी कराने की नीयत से की गई क्रूरता के स्पष्ट और ठोस आरोप हों। सिवाय एक घटना के, जिसमें कपड़े और गहनों की मांग का फोन कॉल दर्ज है, बाकी बयान व्यापक और अस्पष्ट पाए गए।

धारा 377 (अप्राकृतिक यौन संबंध) और 506 (धमकी) जैसे गंभीर आरोपों पर अदालत ने साफ किया कि वे आरोप केवल पति पर लगाए गए हैं। “इस संदर्भ में वर्तमान अपीलकर्ताओं के खिलाफ कोई भी आरोप नहीं है,” पीठ ने कहा।

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फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि ससुराल वालों के खिलाफ मुकदमा जारी रखना “कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग” होगा और उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर व आगे की कार्यवाही रद्द कर दी। हालांकि आदेश ने साफ कर दिया कि पति, जिस पर सीधे तौर पर धारा 498-ए, 377 और 506 के आरोप हैं, उस पर मुकदमा जारी रहेगा।

अदालत ने निष्कर्ष में कहा: “हमारा फैसला केवल अपीलकर्ताओं तक सीमित है। आरोपी पति के खिलाफ कार्यवाही उनके अपने गुण-दोष पर तय होगी।”

इस तरह ससुराल पक्ष की अपील मंज़ूर कर ली गई, जबकि पत्नी और पति के बीच दहेज व क्रूरता का मुकदमा अभी जारी रहेगा।

मामला: संजय डी. जैन एवं अन्य बनाम महाराष्ट्र राज्य एवं अन्य

निर्णय की तिथि: 26 सितंबर 2025

निर्णय डाउनलोड करें

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