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सुप्रीम कोर्ट की जुवेनाइल जस्टिस कमेटी आयोजित करेगी राष्ट्रीय बैठक - बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा और कानूनी सशक्तिकरण पर होगा फोकस

सुप्रीम कोर्ट की जुवेनाइल जस्टिस कमेटी और यूनिसेफ इंडिया मिलकर दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक में बालिका सुरक्षा और सशक्तिकरण पर चर्चा करेंगी।

Vivek G.
सुप्रीम कोर्ट की जुवेनाइल जस्टिस कमेटी आयोजित करेगी राष्ट्रीय बैठक - बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा और कानूनी सशक्तिकरण पर होगा फोकस

नई दिल्ली, 10 अक्टूबर: सुप्रीम कोर्ट की जुवेनाइल जस्टिस कमेटी 11–12 अक्टूबर 2025 को दो दिवसीय राष्ट्रीय वार्षिक हितधारक परामर्श बैठक आयोजित करने जा रही है। इस बैठक का विषय है - “बालिका की सुरक्षा: भारत में उसके लिए सुरक्षित और सक्षम वातावरण की ओर।” इसका उद्देश्य न्यायपालिका, सरकार और सिविल सोसायटी के प्रमुख प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाना है ताकि देशभर में लड़कियों की सुरक्षा और सशक्तिकरण को और मज़बूती दी जा सके।

इस साल की बैठक यूनिसेफ इंडिया के सहयोग से आयोजित की जा रही है और यह अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस (11 अक्टूबर) के अवसर से भी जुड़ी है। इस वर्ष का विषय उस बढ़ती चिंता को दर्शाता है कि भारत में हर लड़की को सुरक्षित, शिक्षित और आत्मनिर्भर माहौल कैसे दिया जाए।

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बैठक की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना, अध्यक्ष - जुवेनाइल जस्टिस कमेटी, और न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला, सदस्य - जुवेनाइल जस्टिस कमेटी करेंगे। भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई उद्घाटन सत्र में मुख्य संबोधन देंगे।

उद्घाटन सत्र में महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, और यूनिसेफ इंडिया की कंट्री रिप्रेजेंटेटिव सिंथिया मैकैफ्री भी भाग लेंगी। इस अवसर पर न्यायमूर्ति पारदीवाला द्वारा “बाल अधिकार और कानून पर हैंडबुक” जारी की जाएगी।

दो दिनों की यह बैठक कई अहम विषयों पर केंद्रित होगी - जैसे बालिकाओं के खिलाफ हिंसा और साइबर अपराधों की रोकथाम, मानव तस्करी, बाल विवाह, और शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच। पहला सत्र “जन्म, पोषण और शिक्षा का अधिकार” पर केंद्रित रहेगा, दूसरा “साइबर अपराधों से बालिका की सुरक्षा” पर, जबकि तीसरा सत्र “बालिकाओं को शोषण, हिंसा और उत्पीड़न से सुरक्षा” पर चर्चा करेगा।

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इन सत्रों में विभिन्न राज्यों की ओर से साझा किए गए सफल अनुभव और नवाचार भी प्रस्तुत किए जाएंगे, जिनमें बालिका तस्करी और बाल विवाह की रोकथाम से जुड़ी प्रभावी पहलें शामिल होंगी। 12 अक्टूबर को बाल यौन अपराधों से संरक्षण (POCSO) अधिनियम, 2012 पर एक विशेष सत्र आयोजित होगा, जिसमें इसके क्रियान्वयन को तेज़ और पीड़िता-हितैषी बनाने के उपायों पर चर्चा की जाएगी।

इस बैठक में उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश, जुवेनाइल जस्टिस और POCSO कमेटी के सदस्य, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, और शिक्षा विभागों के अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।

समापन सत्र में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय, और शिक्षा मंत्रालय के सचिव भी भाग लेंगे, जो आने वाले समय के लिए साझा रणनीति और आगे की रूपरेखा तय करेंगे।

पिछली बैठकों के परिणाम उल्लेखनीय रहे हैं - 2024 की बैठक में दिव्यांग बच्चों की सुरक्षा पर जोर दिया गया था, जिससे राज्यों में निगरानी व्यवस्था और आवासीय संस्थानों में सुधार जैसे कदम उठाए गए। 2023 में बैठक का विषय कानून से टकराव में आए बच्चों के लिए न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना था।

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सुप्रीम कोर्ट की जुवेनाइल जस्टिस कमेटी के एक अधिकारी ने कहा, “बालिकाओं की सुरक्षा केवल कानूनी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामूहिक नैतिक कर्तव्य है। यह परामर्श याद दिलाता है कि हर लड़की की सुरक्षा और शिक्षा ही भारत की प्रगति की नींव है।”

इस वार्षिक संवाद के ज़रिए सुप्रीम कोर्ट यह दोहराता है कि न्याय केवल अदालतों तक सीमित नहीं - यह उन सभी स्थानों तक फैला है जहाँ एक बच्ची को सुरक्षा, सम्मान और अवसर का अधिकार मिलना चाहिए।

कार्यक्रम को लाइव देखा जा सकता है:

https://youtube.com/live/Vxh9XjbmFb4?feature=share

अदालत का आदेश/निर्णय:

सुप्रीम कोर्ट की जुवेनाइल जस्टिस कमेटी ने 10वीं राष्ट्रीय हितधारक परामर्श बैठक आयोजित करने की औपचारिक घोषणा की, और भारत की हर बालिका के लिए सुरक्षित व सक्षम वातावरण निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

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