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छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने मानसिक क्रूरता, परित्याग और अपूरणीय विच्छेद का हवाला देते हुए भिलाई के जोड़े की 29 साल पुरानी शादी को भंग कर दिया

अनिल कुमार सोनमणि @ अनिल स्वामी बनाम श्रीमती। श्रद्धा तिवारी (सोनमणि) - छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने शादी के 29 साल बाद भिलाई के एक व्यक्ति को तलाक दे दिया, जिसमें पत्नी द्वारा क्रूरता और परित्याग का हवाला दिया गया था, जो 2020 में चली गई थी।

Shivam Y.
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने मानसिक क्रूरता, परित्याग और अपूरणीय विच्छेद का हवाला देते हुए भिलाई के जोड़े की 29 साल पुरानी शादी को भंग कर दिया

बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भिलाई निवासी अनिल कुमार सोनमनी और उनकी पत्नी श्रद्धा तिवारी का लगभग तीन दशक पुराना विवाह समाप्त कर दिया है। अदालत ने मानसिक क्रूरता और परित्याग को तलाक के वैध आधार मानते हुए यह आदेश दिया। यह फैसला 18 अगस्त 2025 को न्यायमूर्ति राजनी दुबे और न्यायमूर्ति अमितेन्द्र किशोर प्रसाद की खंडपीठ ने सुनाया। इससे पहले परिवार न्यायालय, दुर्ग ने पति की याचिका खारिज कर दी थी।

मामले की पृष्ठभूमि

दंपति का विवाह दिसंबर 1996 में हुआ था और उनके दो बच्चे हैं - बेटी फाल्गुनी और बेटा अनिकेत। समय बीतने के साथ मतभेद गहराने लगे, खासकर तब जब श्रद्धा ने पीएचडी पूरी कर स्कूल प्रिंसिपल का पद संभाला। सोनमनी के अनुसार, पत्नी के व्यवहार में बदलाव आया और छोटे-छोटे मुद्दों पर झगड़े बढ़ते गए।

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पति, जो पेशे से अधिवक्ता हैं, ने कहा कि कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान उनकी आमदनी बंद हो गई। आरोप है कि उस कठिन समय में पत्नी ने सहयोग करने के बजाय उन्हें "बेरोजगार" कहकर ताने दिए और ऐसी मांगें रखीं जिन्हें वह पूरा नहीं कर पाए।

क्रूरता और अलगाव के आरोप

अगस्त 2020 में श्रद्धा बेटी के साथ घर छोड़कर चली गईं और बाद में एक पत्र लिखकर पति और बेटे से संबंध तोड़ने की इच्छा जताई। कई बार प्रयास करने के बावजूद, जिनमें मुलाकातें और फोन कॉल शामिल थे, वह वापस नहीं लौटीं। दुर्ग के परिवार न्यायालय ने अक्टूबर 2023 में सोनमनी की तलाक याचिका खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में अपील दायर की।

अपील की सुनवाई में अदालत ने गौर किया कि पत्नी ने नोटिस मिलने के बावजूद पेशी नहीं दी। पीठ ने कहा कि वित्तीय संकट के समय ताने देना, बेटी को पिता के खिलाफ भड़काना और बिना उचित कारण घर छोड़ना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है।

अदालत ने कहा,

"कमजोरी के दौर में बार-बार अपमान और सहयोग से मुंह मोड़ लेना मानसिक पीड़ा पहुंचाता है।"

हाईकोर्ट ने पाया कि परित्याग का आरोप पूरी तरह सिद्ध हुआ है। पत्नी द्वारा लिखा गया पत्र, जिसमें उन्होंने रिश्ते को स्थायी रूप से खत्म करने की बात कही थी, स्पष्ट सबूत माना गया। यह animus deserendi यानी स्थायी रूप से छोड़ने की मंशा का प्रमाण है। चूंकि अलगाव दो साल से अधिक चला, इसलिए हिंदू विवाह अधिनियम की शर्तें पूरी हुईं।

पीठ ने कहा कि अब पति-पत्नी के बीच सुलह की कोई संभावना नहीं है। "विवाह अपूरणीय रूप से टूट चुका है और अब सुधार की कोई गुंजाइश नहीं बची है," जजों ने टिप्पणी की।

इस आदेश के साथ लगभग 29 साल पुराने विवाह को कानूनी रूप से समाप्त कर दिया गया और पति को तलाक की राहत मिल गई।


केस का शीर्षक: अनिल कुमार सोनमणि @ अनिल स्वामी बनाम श्रीमती श्रद्धा तिवारी(सोनमणि)

केस नंबर: FA (MAT) No. 316 of 2023

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