दिल्ली हाईकोर्ट ने एयर इंडिया के पूर्व कैजुअल कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त किए जाने को अवैध करार दिया है। अदालत ने माना कि कर्मचारियों की छंटनी इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट की धारा 25-एफ का उल्लंघन थी। हालांकि, कोर्ट ने कर्मचारियों की बहाली से इनकार करते हुए मुआवजे के आदेश को बरकरार रखा।
न्यायमूर्ति शैल जैन ने 8 मई 2026 को यह फैसला सुनाया। मामला सौरज सिंह बनाम इंडियन एयरलाइंस लिमिटेड एवं अन्य सहित कई याचिकाओं से जुड़ा था।
मामले की पृष्ठभूमि
विवाद 1990 के दशक का है, जब इंडियन एयरलाइंस ने हेल्पर, ड्राइवर, स्वीपर और अन्य पदों पर कैजुअल कर्मचारियों के लिए पैनल तैयार किए थे। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्हें विधिवत पैनल के आधार पर नियुक्त किया गया और उन्होंने लगातार 240 दिनों से अधिक काम किया।
कर्मचारियों के अनुसार, 1997-98 के दौरान उनकी सेवाएं बिना नोटिस, बिना नोटिस वेतन और बिना रिट्रेंचमेंट मुआवजे के समाप्त कर दी गईं। उनका आरोप था कि उनकी जगह नए कैजुअल कर्मचारियों को रखा गया।
इससे पहले केंद्रीय सरकारी औद्योगिक न्यायाधिकरण (CGIT) ने भी माना था कि कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करना अवैध था। हालांकि, ट्रिब्यूनल ने बहाली के बजाय 25 हजार रुपये से 55 हजार रुपये तक का मुआवजा देने का आदेश दिया था। इसी राहत को चुनौती देते हुए कर्मचारी हाईकोर्ट पहुंचे थे।
एयर इंडिया ने अदालत में कहा कि निजीकरण के बाद वह संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत “राज्य” नहीं रही, इसलिए उसके खिलाफ रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।
हाईकोर्ट ने यह दलील स्वीकार नहीं की। कोर्ट ने कहा कि भले ही निजी कंपनी के खिलाफ सीधे रिट याचिका सीमित परिस्थितियों में हो, लेकिन लेबर ट्रिब्यूनल के अवॉर्ड की न्यायिक समीक्षा हाईकोर्ट कर सकता है।
कोर्ट ने कहा,
“जब लेबर कोर्ट या इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल कोई अवॉर्ड पारित करता है, तो वह अनुच्छेद 226 और 227 के तहत न्यायिक समीक्षा के दायरे में आता है।”
अदालत ने माना कि एयर इंडिया यह साबित नहीं कर सकी कि कर्मचारियों की सेवाएं पहले के न्यायिक आदेशों के अनुपालन में समाप्त की गई थीं।
कोर्ट ने कहा कि यदि वास्तव में कोर्ट के आदेश के पालन में कार्रवाई होती, तो सभी कर्मचारियों की सेवाएं एक साथ समाप्त की जातीं। इसके बजाय कर्मचारियों को अलग-अलग समय पर हटाया गया।
पीठ ने कहा,
“सेवाएं समाप्त करने का यह बिखरा हुआ और चयनात्मक तरीका न्यायिक आदेश के ईमानदार अनुपालन जैसा नहीं दिखता।”
अदालत ने यह भी माना कि कर्मचारियों ने लगातार 240 दिन से अधिक सेवा दी थी, इसलिए उन्हें इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट की धारा 25-एफ के तहत सुरक्षा प्राप्त थी। चूंकि उन्हें हटाने से पहले नोटिस और मुआवजा नहीं दिया गया, इसलिए छंटनी अवैध थी।
हालांकि कोर्ट ने छंटनी को अवैध माना, लेकिन कर्मचारियों की बहाली का आदेश नहीं दिया। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता कैजुअल और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी थे, जिन्होंने सीमित अवधि तक काम किया था।
कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि विवाद लगभग 30 वर्षों से लंबित है।
सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि धारा 25-एफ के उल्लंघन के हर मामले में बहाली स्वतः नहीं दी जा सकती, विशेषकर तब जब कर्मचारी कैजुअल आधार पर नियुक्त हों।
अंततः अदालत ने ट्रिब्यूनल द्वारा दिए गए मुआवजे को उचित मानते हुए उसे बरकरार रखा।
Case Details
Case Title: Sauraj Singh v. M/s Indian Airlines Ltd. & Anr.
Case Number: W.P.(C) 377/2013 and connected matters
Judge: Justice Shail Jain
Decision Date: 08 May 2026











