छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिवार को राहत देते हुए मुआवजे की राशि में बड़ा इजाफा किया है। अदालत ने कहा कि भविष्य की आय (Future Prospects) और परिवार के सदस्यों के लिए उचित “Loss of Consortium” को ध्यान में रखना जरूरी है।
मामले की पृष्ठभूमि
मामला श्रीमती दुर्गा मिश्रा बनाम रमेश तिवारी से जुड़ा है। यह अपील मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 173 के तहत दायर की गई थी। दावा करने वालों ने ट्रिब्यूनल द्वारा तय ₹16.90 लाख के मुआवजे को कम बताते हुए बढ़ाने की मांग की थी। दूसरी ओर बीमा कंपनी ने कहा कि मृतक की मासिक आय अधिक मानी गई है, इसलिए मुआवजा घटाया जाना चाहिए।
जस्टिस संजय के. अग्रवाल की एकलपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के कई पुराने फैसलों का हवाला देते हुए मुआवजे की दोबारा गणना की। अदालत ने माना कि मृतक की आय में 40% भविष्य संभावनाओं का लाभ जोड़ा जाना चाहिए।
अदालत ने यह भी कहा कि परिवार के प्रत्येक पात्र सदस्य को “Loss of Consortium” के तहत अलग मुआवजा मिलना चाहिए। आदेश में कहा गया,
“मुआवजे की गणना सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय सिद्धांतों के अनुसार की जानी चाहिए।”
हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल द्वारा तय ₹16.90 लाख की राशि बढ़ाकर ₹22,84,740 कर दी। अदालत ने कहा कि दावेदार अतिरिक्त ₹5,94,740 पाने के हकदार होंगे।
कोर्ट ने संबंधित बीमा कंपनी को 45 दिनों के भीतर राशि जमा करने का निर्देश दिया। साथ ही अतिरिक्त रकम पर दावा आवेदन की तारीख से भुगतान तक 9% वार्षिक ब्याज देने का आदेश भी दिया गया।
Case Detials:
Case Title: Smt. Durga Mishra vs Ramesh Tiwari
Case Number: MAC No. 889 of 2019 with MAC No. 890 of 2019
Judge: Justice Sanjay K. Agrawal
Decision Date: May 8, 2026











