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दिल्ली उच्च न्यायालय ने बाल तस्करी बचाव मामले में पुलिस की लापरवाही पर चिंता जताई

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुराड़ी में सेक्स ट्रैफिकिंग रैकेट से बचाई गई नाबालिग लड़कियों की कस्टडी में लापरवाही को लेकर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा। कोर्ट ने 17 जुलाई तक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।

Shivam Y.
दिल्ली उच्च न्यायालय ने बाल तस्करी बचाव मामले में पुलिस की लापरवाही पर चिंता जताई

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करते हुए यह स्पष्ट करने को कहा है कि बुराड़ी इलाके में एक सेक्स ट्रैफिकिंग रैकेट से बचाई गई आठ लड़कियों (नाबालिग और वयस्क) की कस्टडी को लेकर उसमें किस तरह की लापरवाही बरती गई।

यह मामला जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन एलायंस नामक दो गैर-सरकारी संगठनों द्वारा दायर एक रिट याचिका (W.P.(CRL) 1691/2025) के माध्यम से अदालत के समक्ष लाया गया था। याचिकाकर्ताओं ने पुलिस पर आरोप लगाया कि उन्होंने रेस्क्यू के बाद कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया।

"4 और 12 दिसंबर 2024 को बुराड़ी में ट्रैफिकिंग रैकेट से आठ लड़कियों को बचाया गया, लेकिन पुलिस ने उन्हें जेजे एक्ट 2015 की धारा 31 के तहत बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष पेश नहीं किया।"
— याचिकाकर्ता के अधिवक्ता

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याचिका में कहा गया है कि किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 31 के तहत, नाबालिग पीड़ितों को बचाए जाने के बाद अनिवार्य रूप से बाल कल्याण समिति के सामने पेश करना होता है। यह समिति ही बच्चों के पुनर्वास और संरक्षण के निर्णय की अंतिम प्राधिकरण होती है।

हालांकि, याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पुलिस ने इस कानूनी प्रावधान का उल्लंघन किया और लड़कियों को पुनः उस खतरनाक माहौल में छोड़ दिया जिससे उन्हें बचाया गया था। इससे उनके दोबारा तस्करी के शिकार बनने की आशंका जताई गई है।

"बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किए बिना लड़कियों को छोड़ना, उनके संवैधानिक अधिकारों और कानूनों का उल्लंघन है जो उन्हें दोबारा तस्करी का शिकार बना सकता है।"
— अधिवक्ता प्रभासहाय कौर (याचिकाकर्ता की ओर से)

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इसके अलावा, याचिका में यह भी बताया गया कि याचिकाकर्ता ने इस लापरवाही के खिलाफ संयुक्त पुलिस आयुक्त और डीसीपी (उत्तरी जिला) को 13 दिसंबर 2024 और 7 जनवरी 2025 को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

न्यायमूर्ति रवींद्र दुडेजा ने मामले की सुनवाई के बाद दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया और चार सप्ताह में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। अब यह मामला अगली सुनवाई के लिए 17 जुलाई 2025 को सूचीबद्ध किया गया है।

"नोटिस जारी किया जाए। चार सप्ताह में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की जाए। अगली सुनवाई 17 जुलाई 2025 को होगी।"
— माननीय न्यायमूर्ति रवींद्र दुडेजा

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याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुश्री प्रभासहाय कौर, सुश्री तरुणा पंवार, सुश्री शुभ्रा अग्रवाल, सुश्री रचना त्यागी, श्री भुवन ऋभु, सुश्री शशि और सुश्री हर्षिता उपस्थित थीं। वहीं, प्रतिवादियों की ओर से श्री संजीव भंडारी, ASC, श्री अर्जित शर्मा, श्री निकुंज बिंदल और सुश्री निष्ठा ढल्ल उपस्थित थे।

यह मामला न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि मानव तस्करी से पीड़ित नाबालिगों के पुनर्वास और सुरक्षा में कानूनी प्रक्रिया का पालन कितना महत्वपूर्ण है।

मामले का शीर्षक: जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस एंड अन्य बनाम स्टेट ऑफ एनसीटी ऑफ दिल्ली एंड अन्य

मामला संख्या: W.P.(CRL) 1691/2025

अगली सुनवाई की तारीख: 17 जुलाई 2025

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