मेन्यू
समाचार खोजें...
होमSaved

दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुजराल एचयूएफ अवमानना ​​मामले में गलत वकील की उपस्थिति दर्ज होने के बाद सुधार का आदेश दिया

कुलदीप सिंह गुजराल (एचयूएफ) बनाम जसजीत सिंह और अन्य। - दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुजराल एचयूएफ अवमानना ​​मामले में वकील की गलत उपस्थिति को सुधारते हुए सुधार का आदेश दिया; हलफनामा दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया।

Shivam Y.
दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुजराल एचयूएफ अवमानना ​​मामले में गलत वकील की उपस्थिति दर्ज होने के बाद सुधार का आदेश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कुलदीप सिंह गुज्राल (HUF) बनाम जसजीत सिंह एवं अन्य मामले की सुनवाई के दौरान एक अजीब सी गड़बड़ी को स्पष्ट किया। वकील की उपस्थिति दर्ज करने में हुई छोटी-सी गलती को अदालत ने गंभीरता से लिया और औपचारिक सुधार के निर्देश दिए। इस मामले की सुनवाई जस्टिस सौरभ बनर्जी ने की।

पृष्ठभूमि

यह मामला 2019 में दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है। हालांकि असली विवाद अपनी जगह पर है, मगर इस बार अदालत के सामने मुद्दा अवमानना का नहीं बल्कि रिकॉर्ड की शुद्धता का था। 29 अगस्त 2025 को पारित आदेश में गलती से यह दर्ज हो गया कि श्री मनोज खन्ना प्रतिवादी की ओर से उपस्थित थे। याचिकाकर्ता के वकीलों का कहना था कि यह तथ्यात्मक रूप से गलत है क्योंकि उस दिन श्री खन्ना अदालत में थे ही नहीं।

Read also:- बॉम्बे हाईकोर्ट ने कथित झूठे हलफनामे को लेकर ठाणे के सांसद के खिलाफ चुनाव याचिका खारिज करने की याचिका खारिज की

अदालत की टिप्पणियाँ

जब यह मुद्दा उठाया गया, तो याचिकाकर्ता के वकील ने ज़ोर देकर कहा कि अदालत के रिकॉर्ड को वास्तविकता दिखानी चाहिए, न कि किसी गलत उपस्थिति को। दूसरी ओर, अधिवक्ता जे.के. भोला प्रतिवादी संख्या 2 के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। दिलचस्प बात यह रही कि खुद प्रतिवादी संख्या 2 ने ज़िम्मेदारी ली।

जस्टिस बनर्जी ने रिकॉर्ड किया कि प्रतिवादी संख्या 2 ने इस गड़बड़ी के लिए माफी मांगी और इसे 'अनजाने में हुई गलती' बताया। अदालत ने इसे स्वीकार तो किया, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि छोटी-सी गलती भी मामले के इतिहास में भ्रम पैदा कर सकती है।

Read also:- सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने कर्नाटक के तीन न्यायिक अधिकारियों की हाई कोर्ट जज के रूप में नियुक्ति को मंजूरी दी

एक अधिवक्ता ने बताया कि, पीठ ने कहा,

"जिस वकील की उपस्थिति कभी हुई ही नहीं, उसे रिकॉर्ड पर रहने नहीं दिया जा सकता, और इस गलती को उचित तरीके से सुधारा जाना चाहिए।"

फैसला

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने प्रतिवादी संख्या 2 को एक सप्ताह का समय दिया कि वह आवश्यक हलफ़नामा या आवेदन दायर करके गलती को सुधारे। अब यह मामला 22 सितंबर 2025 को फिर से सूचीबद्ध किया जाएगा।

आदेश भले ही छोटा था, लेकिन संदेश साफ़ था: न्यायिक रिकॉर्ड की सटीकता केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि न्याय की निष्पक्षता की रीढ़ है। औपचारिक सुधार के निर्देश देकर हाईकोर्ट ने सुनिश्चित किया कि भविष्य में इस मामले का हवाला तथ्य के आधार पर हो, न कि चूक पर।

केस का शीर्षक: कुलदीप सिंह गुजराल (एचयूएफ) बनाम जसजीत सिंह और अन्य।

केस नंबर: CONT.CAS(C) 995/2019

Mobile App

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Install App
CourtBook Mobile App

More Stories