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दिल्ली हाई कोर्ट ने राजस्थान पुलिस से पूछा – दिल्ली में नाबालिगों की गिरफ्तारी बिना स्थानीय पुलिस को बताए क्यों, मांगी स्थिति रिपोर्ट

दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्थानीय पुलिस को सूचित किए बिना दिल्ली के दो नाबालिगों को गिरफ्तार करने पर राजस्थान पुलिस की आलोचना की; अजमेर के एसपी को तत्काल स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। कपूर बाई बनाम राज्य (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली) एवं अन्य।

Shivam Y.
दिल्ली हाई कोर्ट ने राजस्थान पुलिस से पूछा – दिल्ली में नाबालिगों की गिरफ्तारी बिना स्थानीय पुलिस को बताए क्यों, मांगी स्थिति रिपोर्ट

दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार (30 सितंबर 2025) को चिंता जताई जब यह सामने आया कि राजस्थान पुलिस अधिकारियों ने जनकपुरी, दिल्ली से दो किशोरों को बिना स्थानीय पुलिस को सूचित किए गिरफ्तार कर लिया। मामला उस समय सामने आया जब एक लड़के की मां ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की और आरोप लगाया कि उसका बेटा और उसका चचेरा भाई "सादे कपड़ों में आए लोगों द्वारा जबरन उठा लिए गए।"

पृष्ठभूमि

मामला कपूरी बाई, एक सड़क विक्रेता, की याचिका से शुरू हुआ। वह दशहरा पार्क, जनकपुरी के पास खिलौने बेचती हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि 26 सितंबर को उनका 15 वर्षीय बेटा और रिश्तेदार का 17 वर्षीय लड़का अचानक गायब हो गए, जब उन्हें सादे कपड़ों में कुछ अज्ञात लोग ले गए।

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उन्होंने और उनके परिजनों ने पूरी रात तलाश की और आखिरकार जनकपुरी व हरि नगर थाने का रुख किया। मगर मदद मिलने की बजाय भ्रम फैला रहा—दोनों थानों ने गिरफ्तारी या हिरासत का कोई रिकॉर्ड होने से इंकार कर दिया। अगले दिन परिवार के वकील द्वारा किए गए फोन कॉल्स भी बेनतीजा रहे; रोज़नामचा (डेली रजिस्टर) में दोनों लड़कों का कोई नाम दर्ज नहीं था।

घबराए परिवार ने फिर तुरंत अदालत का दरवाज़ा खटखटाया।

अदालत की टिप्पणियां

सुनवाई के दौरान राज्य के वकील ने स्थिति रिपोर्ट पेश की, जिसमें कहा गया कि लड़कों को वास्तव में राजस्थान के पुष्कर पुलिस ने अगस्त 2025 में दर्ज एक डकैती मामले में गिरफ्तार किया। पुष्कर थाना प्रभारी ने फोन पर पुष्टि की कि लड़कों को 29 सितंबर को दिल्ली से उठाया गया, लेकिन स्वीकार किया कि दिल्ली पुलिस को पहले से कोई सूचना नहीं दी गई।

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इस खुलासे ने जस्टिस ज्योति सिंह और जस्टिस अनीश दयाल की पीठ का ध्यान खींचा। अदालत ने राजस्थान पुलिस को याद दिलाया कि अंतर-राज्य गिरफ्तारी के लिए तय प्रोटोकॉल मौजूद हैं, जिनमें पूर्व अनुमति लेना, स्थानीय थाने से समन्वय करना और गिरफ्तार व्यक्ति को वकील से बात करने का अवसर देना शामिल है।

पीठ ने टिप्पणी की,

"ये सुरक्षा उपाय केवल सजावटी दिशा-निर्देश नहीं हैं; ये स्वतंत्रता की रक्षा के लिए हैं, खासकर बच्चों के मामलों में।"

अदालत ने यह भी दर्ज किया कि दोनों लड़के नाबालिग हैं, फिर भी उनकी उम्र की पुष्टि किए बिना उन्हें राज्य की सीमा पार ले जाया गया। दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील ने भी माना कि पहले के संदीप कुमार मामले में तय दिशा-निर्देशों का साफ उल्लंघन हुआ है।

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फैसला

दोनों पक्षों को सुनने के बाद, हाई कोर्ट ने राजस्थान पुलिस को निर्देश दिया कि वे उसी दिन के अंत तक विस्तृत स्थिति रिपोर्ट दाखिल करें। यह रिपोर्ट अजमेर की पुलिस अधीक्षक वंदिता राणा के हस्ताक्षर से होनी चाहिए और एक प्रति याचिकाकर्ता के वकील को भी दी जाएगी।

इसके अलावा, पुष्कर पुलिस के इंस्पेक्टर विक्रम सिंह राठौर को निर्देश दिया गया कि वे हरि नगर थाने के एसएचओ को केस की प्रगति की जानकारी देते रहें।

अब यह मामला 1 अक्टूबर 2025 को सुबह 10:30 बजे फिर से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है, जब अदालत राजस्थान पुलिस के स्पष्टीकरण की समीक्षा करेगी।

इसी के साथ उस दिन की कार्यवाही समाप्त हुई, और दोनों किशोरों का भविष्य अगली सुनवाई तक अधर में लटक गया।

Case Title: Kapoori Bai v. State (NCT of Delhi) & Ors.

Case Number: W.P. (CRL) 3239/2025

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