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वकील बनाम डॉक्टर: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वकील की मौत में लापरवाही की भूमिका की जांच के लिए रिटायर्ड जज को नियुक्त किया।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिवक्ता जागृति शुक्ला की मौत और एसआरएन अस्पताल विवाद की जांच के लिए रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं तथा मामले में गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। - अमित कुमार सिंह उर्फ ​​सोनू सिंह और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और 9 अन्य

CB News Desk
वकील बनाम डॉक्टर: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वकील की मौत में लापरवाही की भूमिका की जांच के लिए रिटायर्ड जज को नियुक्त किया।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिवक्ता जागृति शुक्ला की मौत और प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल में वकीलों तथा डॉक्टरों के बीच हुए विवाद को लेकर महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। अदालत ने पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश से न्यायिक जांच कराने का निर्देश दिया है।

साथ ही, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संबंधित आपराधिक मामले की जांच जारी रहेगी, लेकिन फिलहाल किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की जाएगी।

मामले की पृष्ठभूमि

रिकॉर्ड के अनुसार, 20 मई 2026 की सुबह इलाहाबाद हाईकोर्ट की अधिवक्ता जागृति शुक्ला एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। उन्हें अन्य वकीलों द्वारा तत्काल एसआरएन अस्पताल ले जाया गया।

याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि अस्पताल में उन्हें समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिली। इसी दौरान वकीलों और अस्पताल के डॉक्टरों व कर्मचारियों के बीच विवाद और हाथापाई की स्थिति उत्पन्न हो गई। घटना के संबंध में कोतवाली, प्रयागराज में एफआईआर दर्ज की गई।

बाद में जागृति शुक्ला को निजी अस्पताल और फिर लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई रेफर किया गया, जहां 7 जून 2026 को उपचार के दौरान उनका निधन हो गया।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि पूरे घटनाक्रम ने दो पेशेवर समूहों के बीच टकराव का रूप ले लिया है, जिससे निष्पक्ष जांच को लेकर स्वाभाविक प्रश्न खड़े होते हैं।

पीठ ने कहा, “इस घटना की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।”

हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि चिकित्सा लापरवाही के आरोपों पर कोई अंतिम टिप्पणी करना उचित नहीं होगा, क्योंकि इसके लिए विशेषज्ञों की राय आवश्यक है।

कोर्ट ने वकीलों द्वारा किए गए सड़क अवरोध और डॉक्टरों की हड़ताल, दोनों पर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि आम नागरिकों को आवागमन और चिकित्सा सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण टंडन से पूरे मामले की जांच करने का अनुरोध किया है।

जांच में यह देखा जाएगा कि क्या जागृति शुक्ला को अस्पताल पहुंचने पर तत्काल और उचित उपचार मिला था, क्या उनके उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही हुई, और अस्पताल में वकीलों तथा डॉक्टरों के बीच हुई झड़प के लिए कौन जिम्मेदार था।

अदालत ने जांच अधिकारी को गवाहों, दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और विशेषज्ञों को तलब करने की भी अनुमति दी है। रिपोर्ट 30 सितंबर 2026 तक सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत करने को कहा गया है।

हाईकोर्ट ने कहा कि मामले की पुलिस जांच जारी रहेगी, लेकिन केस क्राइम नंबर 0046/2026 में किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि घटना को काफी समय बीत चुका है और वर्तमान परिस्थितियों में हिरासत में पूछताछ आवश्यक नहीं दिखती, विशेषकर जब आरोपित चिकित्सा पेशे से जुड़े हैं।

इसके साथ ही अदालत ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि शहर में किसी भी प्रकार का सड़क अवरोध न होने दिया जाए और सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा सेवाएं बाधित न हों। कोर्ट ने चेतावनी दी कि उसके आदेशों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है।

मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है।

Case Details

Case Title: Amit Kumar Singh @ Sonu Singh and Another v. State of U.P. and 9 Others (along with connected PIL matters)

Case Number: Criminal Writ-Public Interest Litigation No. 8 of 2026

Judges: Justice Salil Kumar Rai and Justice Swarupama Chaturvedi

Decision Date: 10 June 2026

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