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केरल हाई कोर्ट ने सबरीमला थंथ्री को ‘क्लीन चिट’ देने वाली विजिलेंस कोर्ट की टिप्पणियां हटाईं, कहा- जमानत आदेश से जांच प्रभावित नहीं होनी चाहिए

केरल हाई कोर्ट ने सबरीमला मामले में जमानत देते समय विजिलेंस कोर्ट द्वारा की गई कुछ टिप्पणियों को हटाते हुए कहा कि ऐसी टिप्पणियां चल रही जांच और अभियोजन को प्रभावित कर सकती हैं। - केरल राज्य बनाम कंडारारू राजीवरू @ राजीव टी।

CB News Desk
केरल हाई कोर्ट ने सबरीमला थंथ्री को ‘क्लीन चिट’ देने वाली विजिलेंस कोर्ट की टिप्पणियां हटाईं, कहा- जमानत आदेश से जांच प्रभावित नहीं होनी चाहिए

केरल हाई कोर्ट ने सबरीमला मंदिर से जुड़े दो आपराधिक मामलों में महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए विजिलेंस कोर्ट की उन टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटाने का निर्देश दिया है, जिनमें जमानत देते समय आरोपी के खिलाफ उपलब्ध सामग्री का विस्तृत मूल्यांकन किया गया था। अदालत ने कहा कि जमानत पर विचार करते समय की गई ऐसी टिप्पणियां जांच और अभियोजन के अधिकारों को प्रभावित नहीं कर सकतीं।

न्यायमूर्ति ए. बदरुद्दीन ने 9 जून 2026 को राज्य सरकार द्वारा दायर दो याचिकाओं पर यह आदेश पारित किया।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज अपराध संख्या 3700/2025 और 3701/2025 से संबंधित है। इन मामलों में कंदरारू राजीवरारू उर्फ राजीव टी. को आरोपी संख्या 16 बनाया गया था। उन्हें विजिलेंस कोर्ट से जमानत मिल चुकी थी।

राज्य सरकार ने जमानत रद्द करने की मांग नहीं की थी। उसकी आपत्ति केवल विजिलेंस कोर्ट के आदेश के पैरा 79, 80, 87 और 88 में दर्ज टिप्पणियों को लेकर थी। राज्य का कहना था कि इन टिप्पणियों से ऐसा प्रतीत होता है मानो अदालत ने आरोपी को पहले ही दोषमुक्त मान लिया हो, जिससे जांच और भविष्य के मुकदमे पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि जमानत याचिका पर सुनवाई करते समय अदालत उपलब्ध सामग्री का प्रारंभिक मूल्यांकन कर सकती है, लेकिन उसे ऐसे निष्कर्ष नहीं देने चाहिए जो जांच की दिशा को प्रभावित करें या अभियोजन के मामले को कमजोर करें।

वहीं आरोपी की ओर से कहा गया कि जमानत आदेश पूरी तरह कारणों पर आधारित था और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित सिद्धांतों के अनुरूप पारित किया गया था। बचाव पक्ष का कहना था कि जमानत देते समय अदालत को आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करना ही पड़ता है।

रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद हाई कोर्ट ने पाया कि विशेष न्यायाधीश ने जमानत पर निर्णय लेते समय आवश्यक सीमा से आगे जाकर कुछ निष्कर्ष दर्ज कर दिए थे।

अदालत ने कहा, “जमानत देने वाली अदालत को यह अधिकार है कि वह उपलब्ध सामग्री का प्रारंभिक मूल्यांकन करे, लेकिन इस अधिकार का उपयोग इस प्रकार नहीं किया जा सकता कि उससे जांच या अभियोजन की प्रक्रिया ही निष्प्रभावी हो जाए।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच अधिकारी आगे और साक्ष्य एकत्र कर सकता है तथा उन साक्ष्यों का अंतिम मूल्यांकन ट्रायल कोर्ट द्वारा कानून के अनुसार किया जाएगा।

राज्य की सीमित मांग स्वीकार करते हुए केरल हाई कोर्ट ने विजिलेंस कोर्ट के आदेश के पैरा 79, 80, 87 और 88 में की गई टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटाने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इससे अभियोजन के जांच और मुकदमा चलाने के अधिकार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट आरोप तय करने, डिस्चार्ज आवेदन पर विचार करने तथा अंतिम सुनवाई के समय अभियोजन की पूरी सामग्री और ट्रायल के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर स्वतंत्र रूप से निर्णय करेगा।

Case Details:

Case Title: State of Kerala v. Kandararu Rajeevaru @ Rajeev T.

Case Numbers: Crl.M.C. Nos. 2455 of 2026 & 2717 of 2026

Judge: Justice A. Badharudeen

Decision Date: June 9, 2026

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