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NDPS केस में सुप्रीम कोर्ट सख्त: बिना कानूनी शर्तें पूरी किए दी गई जमानत रद्द, आरोपी को सरेंडर का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने NDPS मामले में हाई कोर्ट द्वारा दी गई जमानत रद्द कर दी, कहा—धारा 37 की अनिवार्य शर्तें पूरी किए बिना राहत नहीं दी जा सकती। - पंजाब राज्य बनाम सुखविंदर सिंह उर्फ ​​गोरा और संबंधित मामला

Rajan Prajapati
NDPS केस में सुप्रीम कोर्ट सख्त: बिना कानूनी शर्तें पूरी किए दी गई जमानत रद्द, आरोपी को सरेंडर का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के एक ड्रग्स मामले में अहम फैसला देते हुए हाई कोर्ट द्वारा दी गई जमानत को रद्द कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि जब मामला “कमर्शियल क्वांटिटी” (बड़ी मात्रा) का हो, तो जमानत देने से पहले कानून की अनिवार्य शर्तों का पालन जरूरी है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला पंजाब के तरनतारन जिले में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें आरोपियों के पास से लगभग 1.465 किलोग्राम हेरोइन बरामद हुई थी। यह मात्रा NDPS Act के तहत “कमर्शियल क्वांटिटी” मानी जाती है, जिस पर जमानत के नियम काफी सख्त होते हैं।

ट्रायल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल होने के बाद आरोप तय किए गए थे, लेकिन सुनवाई धीमी गति से चल रही थी और कई गवाहों की गवाही बाकी थी। इसी आधार पर आरोपी ने हाई कोर्ट से जमानत मांगी, जिसे मंजूर कर लिया गया।

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सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि NDPS Act की धारा 37 के तहत जमानत देने के लिए दो जरूरी शर्तें होती हैं:

  1. अदालत को संतुष्ट होना चाहिए कि आरोपी प्रथम दृष्टया दोषी नहीं है
  2. आरोपी जमानत पर रहते हुए कोई अपराध नहीं करेगा

कोर्ट ने कहा,

“इन दोनों शर्तों का रिकॉर्ड में स्पष्ट उल्लेख होना अनिवार्य है। यह केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि कानूनी आवश्यकता है।”

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि तेज सुनवाई का अधिकार (Article 21) महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे NDPS Act की सख्त शर्तों को नजरअंदाज करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने हाई कोर्ट के उस दृष्टिकोण को गलत बताया, जिसमें कहा गया था कि लंबी हिरासत के कारण NDPS Act की सख्ती को “कम किया जा सकता है।”

सुप्रीम कोर्ट ने कुछ गंभीर कमियों की ओर भी इशारा किया:

  • हाई कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ अन्य मामलों की सही जानकारी पर ध्यान नहीं दिया
  • पहले जमानत आवेदन के खारिज होने का उल्लेख आदेश में नहीं किया गया
  • आरोपी द्वारा दी गई जानकारी अधूरी थी, जिससे अदालत को पूरी तस्वीर नहीं मिल पाई

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कोर्ट ने कहा,

“जो व्यक्ति अदालत से राहत चाहता है, उसे पूरी और स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए। अधूरी जानकारी देना उचित नहीं है।”

इन सभी कारणों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट का जमानत आदेश रद्द कर दिया।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि आरोपी एक सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट के सामने आत्मसमर्पण करे। साथ ही, उसे यह स्वतंत्रता दी गई कि वह दोबारा उचित आधार पर जमानत के लिए आवेदन कर सकता है।

Case Details:

Case Title: State of Punjab vs Sukhwinder Singh @ Gora & connected matter

Case Number: Criminal Appeal arising out of SLP (Crl.) No. 5020/2026 & 5075/2026

Judge: Justice Sanjay Karol, Justice Augustine George Masih

Decision Date: 24 April 2026

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