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सुप्रीम कोर्ट ने अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर दिवालियापन मामले में समाधान योजनाओं को बहाल किया, देरी के लिए GNIDA को फटकार लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने GNIDA की निष्क्रियता पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि उसकी देरी और लापरवाही से हजारों खरीदारों की परियोजनाएं वर्षों तक अटकी रहीं। - अल्फा कॉर्प डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड बनाम ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण और अन्य।

Rajan Prajapati
सुप्रीम कोर्ट ने अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर दिवालियापन मामले में समाधान योजनाओं को बहाल किया, देरी के लिए GNIDA को फटकार लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा की कई रुकी हुई हाउसिंग और कमर्शियल परियोजनाओं से जुड़े बड़े विवाद में अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) की लगातार निष्क्रियता और देरी ने स्थिति को और खराब किया। अदालत ने कहा कि प्राधिकरण समय पर कार्रवाई करता तो हजारों घर खरीदारों को वर्षों तक इंतजार नहीं करना पड़ता।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद दिवालियापन एवं दिवालिया संहिता, 2016 (IBC) के तहत चल रही कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) से जुड़ा है। कंपनी के कई प्रोजेक्ट - अर्थ टाउन, अर्थ टेकवन, अर्थ सैफायर कोर्ट और अर्थ कोपिया - अधूरे रह गए थे। बाद में इन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए अल्फा कॉर्प डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड और रोमा यूनिकॉन डिज़ाइनएक्स कंसोर्टियम ने रिजॉल्यूशन प्लान दिए।

GNIDA ने इन योजनाओं का विरोध करते हुए कहा कि जिन जमीनों पर परियोजनाएं बनीं, वे उसकी लीज पर दी गई थीं और उसकी अनुमति के बिना विकास अधिकार या लीज अधिकार किसी अन्य संस्था को नहीं दिए जा सकते।

न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि GNIDA लंबे समय तक केवल नोटिस जारी करता रहा लेकिन परियोजनाओं की निगरानी या समय पर कड़ी कार्रवाई नहीं की।

अदालत ने कहा,

“GNIDA ने लगातार निष्क्रियता और लापरवाही दिखाई, जिससे मौजूदा स्थिति और गंभीर हो गई।”

पीठ ने यह भी नोट किया कि GNIDA को परियोजनाओं में देरी और खरीदारों की शिकायतों की जानकारी वर्षों पहले से थी। इसके बावजूद उसने न तो प्रभावी रिकवरी की और न ही परियोजनाओं को समय पर पूरा कराने के लिए ठोस कदम उठाए।

सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि हजारों घर और ऑफिस स्पेस खरीदारों ने अपनी मेहनत की कमाई इन परियोजनाओं में लगाई थी और 2016 से कई परियोजनाएं रुकी पड़ी हैं। अदालत ने कहा कि खरीदारों को लंबे समय तक अनिश्चितता में छोड़ना उचित नहीं है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि GNIDA बाद में खुद को “अनजान पीड़ित” की तरह पेश नहीं कर सकता, क्योंकि उसे परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति की जानकारी थी।

इससे पहले राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील अधिकरण(NCLAT) ने NCLT द्वारा मंजूर रिजॉल्यूशन प्लानों को रद्द कर दिया था और कहा था कि GNIDA की अनुमति के बिना लीज भूमि से जुड़े अधिकार ट्रांसफर नहीं हो सकते।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी नोट किया कि GNIDA ने कई दावे बहुत देर से दाखिल किए और कुछ मामलों में सही अधिकारी के बजाय पुराने IRP को पत्र भेज दिए। अदालत ने इस रवैये को “असंगत और बिना उचित ध्यान के” बताया।

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि GNIDA की देरी, निगरानी की कमी और निष्क्रिय रवैये ने विवाद को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजनाओं के खरीदारों के हितों की अनदेखी नहीं की जा सकती।

Case Details:

Case Title: Alpha Corp Development Private Limited v. Greater Noida Industrial Development Authority & Ors.

Case Number: Civil Appeal No. 1526 of 2023 and connected matters

Judge: Justice Sanjay Kumar and Justice Alok Aradhe

Decision Date: May 05, 2026

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