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सुप्रीम कोर्ट ने मानसिक स्वास्थ्य पर छात्र के ट्रांसफर आग्रह पर IIT से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर छात्र के ट्रांसफर आग्रह पर आईआईटी खड़गपुर, आईआईटी दिल्ली और AIIMS से त्वरित जवाब मांगा।

Vivek G.
सुप्रीम कोर्ट ने मानसिक स्वास्थ्य पर छात्र के ट्रांसफर आग्रह पर IIT से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आईआईटी खड़गपुर, आईआईटी दिल्ली और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) से एक छात्र की ट्रांसफर याचिका पर अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा। अदालत ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को “हाशिए का मुद्दा नहीं माना जा सकता।” दो न्यायाधीशों की पीठ ने जब याचिकाकर्ता की दलील सुनी तो कोर्टरूम में पूरी शांति थी।

पृष्ठभूमि

यह मामला संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका से जुड़ा है। अनुसूचित जाति पृष्ठभूमि का यह छात्र वर्तमान में आईआईटी खड़गपुर में बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर कोर्स में नामांकित है। उसने अदालत को बताया कि उसे डिप्रेशन और बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर का निदान हुआ है और उसे दिल्ली के AIIMS में लगातार इलाज की जरूरत है। चूंकि आईआईटी दिल्ली में आर्किटेक्चर का कोर्स नहीं है, वह अपनी जेईई एडवांस्ड रैंक के अनुसार समकक्ष बी.टेक कोर्स में शिफ्ट होने को तैयार है।

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उसके वकीलों- विपिन नायर, आदित्य नरेंदननाथ और एम.बी. रम्या-ने तर्क दिया कि छात्र को खड़गपुर में रोके रखना उसकी स्थिति को और खराब कर सकता है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सुकदेब साहा बनाम आंध्र प्रदेश राज्य फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि “मानसिक स्वास्थ्य, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।”

अदालत की टिप्पणियाँ

संक्षिप्त सुनवाई के दौरान जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने कहा, “यदि शिक्षा को फलना-फूलना है तो छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।” जस्टिस आर. महादेवन ने जोड़ा कि उच्च शिक्षण संस्थानों को “केवल अकादमिक नहीं, छात्र जीवन की वास्तविकताओं के प्रति संवेदनशील होना चाहिए।”

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पीठ ने माना कि आईआईटी के बीच ट्रांसफर सामान्यतः कठिन होता है, लेकिन कहा कि यह याचिका गंभीर है क्योंकि यह गरिमा के बुनियादी सवाल को छूती है। न्यायाधीशों ने जोर देकर कहा कि मामला लंबा नहीं खिंचना चाहिए, यह देखते हुए कि इलाज और पारिवारिक सहारा युवा की रिकवरी के लिए अहम हो सकता है।

निर्णय

अदालत ने आईआईटी खड़गपुर, आईआईटी दिल्ली और AIIMS को औपचारिक नोटिस जारी कर 10 अक्टूबर 2025 तक जवाब देने को कहा। अंतिम फैसला अभी नहीं आया, लेकिन पीठ ने साफ कर दिया कि संस्थानों को बताना होगा कि क्या ट्रांसफर या कोई वैकल्पिक व्यवस्था संभव है ताकि छात्र को समय पर मानसिक स्वास्थ्य देखभाल मिल सके।

Case Title: Student Mental Health Transfer Plea – SC Notice to IIT Kharagpur, IIT Delhi & AIIMS

Date of Order: 26 September 2025

Petitioner: Scheduled Caste student, IIT Kharagpur

Respondents: IIT Kharagpur, IIT Delhi, AIIMS

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