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AI से बने ‘काल्पनिक’ फैसलों पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी चेतावनी, ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर लगाई रोक

गुम्माडी उषा रानी और अन्य बनाम श्योर मल्लिकार्जुन राव और अन्य - सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश मामले में निचली अदालत द्वारा एआई-जनरेटेड फर्जी फैसलों के इस्तेमाल पर सवाल उठाया; नोटिस जारी किया और कार्यवाही रोक दी।

Shivam Y.
AI से बने ‘काल्पनिक’ फैसलों पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी चेतावनी, ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसे मामले में गंभीर चिंता जताई, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने अपने आदेश में जिन फैसलों का हवाला दिया, वे असल में मौजूद ही नहीं थे। अदालत ने कहा कि अगर किसी निर्णय की नींव ही नकली या एआई से तैयार किए गए तथ्यों पर रखी जाए, तो यह केवल गलती नहीं बल्कि गंभीर दुराचार हो सकता है।

मामले की पृष्ठभूमि

विवाद एक संपत्ति से जुड़ा है, जिसमें वादी ने निषेधाज्ञा (injunction) की मांग की थी। मुकदमे के दौरान ट्रायल कोर्ट ने संपत्ति की स्थिति जानने के लिए एक एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया।

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प्रतिवादियों ने कमिश्नर की रिपोर्ट पर आपत्ति जताई, लेकिन 19 अगस्त 2025 को ट्रायल कोर्ट ने उनकी आपत्ति खारिज कर दी। आदेश में कुछ सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला दिया गया।

बाद में यह सामने आया कि जिन निर्णयों का उल्लेख किया गया था, वे वास्तव में अस्तित्व में ही नहीं थे और कथित तौर पर एआई से तैयार किए गए थे।

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने इस आपत्ति को सुना और माना कि जिन फैसलों का जिक्र किया गया, वे असली नहीं थे। हालांकि, हाईकोर्ट ने चेतावनी दर्ज करते हुए मामले को मेरिट के आधार पर खारिज कर दिया।

इसके बाद याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।

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जस्टिस पामिडीघंटम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने कहा,

“यह मामला केवल निर्णय के गुण-दोष का नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की शुचिता का है।”

अदालत ने स्पष्ट किया,

“किसी गैर-मौजूद और फर्जी फैसले के आधार पर दिया गया आदेश केवल निर्णय में त्रुटि नहीं है। यह दुराचार है और इसके कानूनी परिणाम होंगे।”

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पीठ ने कहा कि इस मुद्दे की गहराई से जांच जरूरी है क्योंकि इसका सीधा संबंध न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता से है।

सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि विशेष अनुमति याचिका (SLP) के लंबित रहने तक वह एडवोकेट कमिश्नर की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई न करे।

साथ ही, अदालत ने अटॉर्नी जनरल, सॉलिसिटर जनरल और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को भी नोटिस जारी किया है। वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान को न्यायालय की सहायता के लिए नियुक्त किया गया है।

मामले की अगली सुनवाई 10 मार्च 2026 को होगी।

Case Title:- Gummadi Usha Rani & Anr. v. Sure Mallikarjuna Rao & Anr.

Case Number:- Special Leave Petition (Civil) No. 7575 of 2026

Date of Order:- 27 February 2026

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