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चुनाव याचिका पर अंतिम निर्णय हो जाने के बाद, प्राधिकरण परिणाम को दोबारा नहीं खोल सकता: उत्तर प्रदेश ग्राम प्रधान मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने ग्राम प्रधान चुनाव पुनर्गणना मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए उर्मिला देवी की अपील खारिज कर दी। - उर्मिला देवी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य।

Rajan Prajapati
चुनाव याचिका पर अंतिम निर्णय हो जाने के बाद, प्राधिकरण परिणाम को दोबारा नहीं खोल सकता: उत्तर प्रदेश ग्राम प्रधान मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के एटा जिले की ग्राम पंचायत चुनाव से जुड़े एक विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए उर्मिला देवी की अपील खारिज कर दी। मामला 2021 के ग्राम प्रधान चुनाव में मतगणना के बाद पुनर्गणना और उसके आधार पर घोषित परिणाम से जुड़ा था।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद ग्राम पंचायत परौली सुहागपुर, ब्लॉक जैथरा, जिला एटा के प्रधान चुनाव से जुड़ा था। चुनाव परिणाम में मनोज देवी को केवल दो वोटों के अंतर से विजेता घोषित किया गया था, जबकि उर्मिला देवी दूसरे स्थान पर रहीं।

उर्मिला देवी ने आरोप लगाया कि मतगणना प्रक्रिया के दौरान कई अनियमितताएं हुईं। उन्होंने कहा कि वैध मतों की संख्या और गिने गए मतों में अंतर था तथा कुछ वैध मतपत्रों को गलत तरीके से निरस्त किया गया। इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा 12C के तहत चुनाव याचिका दायर कर पुनर्गणना की मांग की।

सुनवाई के दौरान उप जिलाधिकारी (प्रेस्क्राइब्ड अथॉरिटी) ने चुनाव रिकॉर्ड और फॉर्म 45 तथा फॉर्म 46 का परीक्षण किया। रिकॉर्ड में मतों की संख्या को लेकर विसंगतियां पाई गईं। चूंकि जीत का अंतर केवल दो वोट था, इसलिए अदालत ने पुनर्गणना को आवश्यक माना।

5 नवंबर 2022 को एसडीओ ने पुनर्गणना का आदेश दिया और 7 नवंबर 2022 को मतगणना कराने के निर्देश जारी किए। बाद में पुनर्गणना के आधार पर उर्मिला देवी को 12 वोटों से विजेता घोषित कर दिया गया।

मनोज देवी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर पुनर्गणना आदेश को चुनौती दी। हाईकोर्ट ने माना कि एसडीओ ने 5 नवंबर 2022 के आदेश में चुनाव याचिका का अंतिम निस्तारण कर दिया था। ऐसे में वह “फंक्टस ऑफिशियो” हो गए थे, यानी उसके बाद उनके पास आगे कोई आदेश पारित करने का अधिकार नहीं बचा था।

हाईकोर्ट ने पुनर्गणना और उसके बाद घोषित परिणाम दोनों को रद्द कर दिया। अदालत ने यह भी कहा कि चुनाव मामलों में प्राधिकरण को बेहद सावधानी से काम करना चाहिए।

जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने कहा कि यह देखना जरूरी था कि 5 नवंबर 2022 का आदेश अंतरिम था या अंतिम। अदालत ने पाया कि एसडीओ ने चुनाव याचिका को पूरी तरह स्वीकार कर लिया था और उसके बाद पुनर्गणना कराकर नया परिणाम घोषित किया।

पीठ ने कहा,

“एक बार अंतिम आदेश पारित होने के बाद प्राधिकरण ‘फंक्टस ऑफिशियो’ हो जाता है और उसके बाद आगे कोई आदेश पारित नहीं कर सकता।”

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव परिणाम निरस्त करने का अधिकार केवल प्रेस्क्राइब्ड अथॉरिटी के पास होता है और अधिकार समाप्त होने के बाद वह दोबारा इस शक्ति का प्रयोग नहीं कर सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला सही था और उसमें हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने उर्मिला देवी की अपील खारिज कर दी।

Case Details:

Case Title: Urmila Devi v. State of Uttar Pradesh & Ors.

Case Number: Civil Appeal No. 7427 of 2026 (arising out of SLP (C) No. 9638 of 2023)

Judges: Justice Aravind Kumar and Justice Prasanna B. Varale

Decision Date: May 11, 2026

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