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गुजरात हाईकोर्ट ने हत्या मामले में दोषसिद्धि बरकरार रखी, एकल प्रत्यक्षदर्शी की गवाही को माना भरोसेमंद

गुजरात हाईकोर्ट ने हत्या मामले में सत्र अदालत की सजा बरकरार रखी, प्रत्यक्षदर्शी की सुसंगत गवाही और वैज्ञानिक साक्ष्यों को भरोसेमंद माना। - नमोरी हाजीभाई बुकेरा बनाम गुजरात राज्य

Shivam Y.
गुजरात हाईकोर्ट ने हत्या मामले में दोषसिद्धि बरकरार रखी, एकल प्रत्यक्षदर्शी की गवाही को माना भरोसेमंद

गुजरात हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में हत्या के मामले में सत्र अदालत द्वारा दी गई सजा को बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि यदि प्रत्यक्षदर्शी की गवाही विश्वसनीय और सुसंगत हो, तो उसी के आधार पर दोषसिद्धि कायम रखी जा सकती है।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला वर्ष 2013 की एक घटना से जुड़ा है, जहां मृतक अपने मित्र (शिकायतकर्ता) के साथ आरोपी से पैसे मांगने गया था। रास्ते में आरोपी ने कथित रूप से देशी बंदूक से गोली चलाई, जिससे मृतक को गंभीर चोटें आईं और उसकी मृत्यु हो गई।

जांच के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया और ट्रायल के बाद सत्र न्यायालय ने मुख्य आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और आर्म्स एक्ट की धारा 25(1B)(a) के तहत दोषी ठहराया।

अपीलकर्ता की ओर से दलील दी गई कि:

  • पूरा मामला केवल शिकायतकर्ता की गवाही पर आधारित है
  • स्वतंत्र गवाहों का अभाव है
  • बरामद हथियार और फॉरेंसिक साक्ष्य आरोपी को सीधे तौर पर नहीं जोड़ते
  • जांच में कई खामियां हैं

वहीं राज्य की ओर से कहा गया कि शिकायतकर्ता की गवाही स्पष्ट, सुसंगत और अन्य साक्ष्यों से पुष्ट है, इसलिए दोषसिद्धि सही है।

खंडपीठ ने रिकॉर्ड और साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता एक प्रत्यक्षदर्शी है और उसकी गवाही “स्वाभाविक, स्पष्ट और भरोसेमंद” है।

अदालत ने कहा,

“प्रत्यक्षदर्शी ने घटना का पूरा विवरण बिना किसी विरोधाभास के प्रस्तुत किया है और उसकी गवाही अन्य साक्ष्यों से भी मेल खाती है।”

अदालत ने यह भी माना कि:

  • घटनास्थल, हथियार और चोटों के संबंध में वैज्ञानिक (FSL) साक्ष्य अभियोजन के पक्ष में हैं
  • मृतक के कपड़ों और स्थल से मिले खून का मिलान उसकी ही रक्त समूह से हुआ
  • पोस्टमार्टम और पंचनामा से यह स्पष्ट है कि मृत्यु गोली लगने से हुई

साथ ही, अदालत ने यह भी कहा कि मामूली विरोधाभास या जांच की छोटी कमियां पूरे मामले को कमजोर नहीं करतीं।

अदालत ने पाया कि अभियोजन ने संदेह से परे यह सिद्ध कर दिया है कि आरोपी ने अवैध हथियार से गोली चलाकर मृतक की हत्या की।

इसी आधार पर हाईकोर्ट ने अपील खारिज करते हुए सत्र न्यायालय के फैसले और सजा को बरकरार रखा।

Case Details

Case Title: Namori Hajibhai Bukera vs State of Gujarat

Case Number: Criminal Appeal No. 2597 of 2022

Judge: Justice Ilesh J. Vora & Justice R. T. Vachhani

Decision Date: 21 April 2026

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