बेंगलुरु की अदालत कक्ष में सोमवार दोपहर असामान्य सन्नाटा था। महीनों से चली आ रही कानूनी लड़ाई का अंत आखिरकार आ गया। कर्नाटक हाईकोर्ट ने 140-बागेपल्ली विधानसभा सीट से 2023 में चुने गए विधायक का चुनाव रद्द कर दिया।
न्यायमूर्ति एम.जी.एस. कमल की एकलपीठ ने पाया कि उम्मीदवार ने नामांकन के साथ दाखिल किए गए हलफनामे (Form 26) में अपनी संपत्तियों और व्यवसायिक खातों का पूरा खुलासा नहीं किया था।
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यह मामला भाजपा प्रत्याशी श्री सी. मुनिराजू द्वारा दायर चुनाव याचिका से जुड़ा था, जिसमें कांग्रेस उम्मीदवार की जीत को चुनौती दी गई थी। अदालत का विस्तृत आदेश 16 फरवरी 2026 को सुनाया गया।
मामले की पृष्ठभूमि
2023 के विधानसभा चुनाव में बागेपल्ली सीट से कांग्रेस उम्मीदवार विजयी हुए थे। भाजपा के प्रत्याशी सी. मुनिराजू ने आरोप लगाया कि विजेता उम्मीदवार ने नामांकन पत्र के साथ दाखिल हलफनामे में कई अहम जानकारियाँ छिपाईं।
याचिका में कहा गया कि-
- कई सक्रिय व्यवसायों का खुलासा नहीं किया गया।
- उन व्यवसायों से जुड़े करंट अकाउंट का बैलेंस नहीं बताया गया।
- कृषि भूमि की वास्तविक सीमा और बाजार मूल्य का सही विवरण नहीं दिया गया।
- कुछ संपत्तियों की कीमत कम दिखाई गई।
याचिकाकर्ता का दावा था कि यह सब मतदाताओं को गुमराह करने के लिए किया गया और यह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123 के तहत “भ्रष्ट आचरण” की श्रेणी में आता है।
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अदालत की मुख्य टिप्पणियाँ
सुनवाई के दौरान अदालत ने Form 26 में दिए गए खुलासों का विस्तार से परीक्षण किया।
1. व्यवसाय और करंट अकाउंट का खुलासा
अदालत ने पाया कि प्रत्याशी और उनकी पत्नी होटल व शराब व्यवसाय से जुड़े थे। हालांकि हलफनामे में कुछ निवेश और शेयरों का जिक्र था, लेकिन कई सक्रिय व्यवसायों के नाम और उनके करंट अकाउंट का विवरण नहीं दिया गया।
न्यायालय ने कहा,
“जब प्रत्याशी स्वयं स्वीकार करता है कि वह व्यवसाय कर रहा है, तब उन व्यवसायों और उनसे जुड़े खातों का उल्लेख अनिवार्य है।”
अदालत ने माना कि यह केवल तकनीकी त्रुटि नहीं थी, बल्कि जरूरी जानकारी का अभाव था।
2. कृषि भूमि का अधूरा विवरण
रिकॉर्ड ऑफ राइट्स (RTC) के आधार पर अदालत ने पाया कि एक सर्वे नंबर में 2 एकड़ 22.5 गुंटा भूमि का उल्लेख हलफनामे में नहीं किया गया था।
कोर्ट ने टिप्पणी की,
“यदि यह केवल अनजाने में हुई गलती होती, तो कम से कम उस भूमि का अनुमानित बाजार मूल्य तो दर्शाया जाता।”
अदालत ने इसे महत्वपूर्ण चूक माना।
3. अन्य आरोप
कुछ आरोप-जैसे बैंक बैलेंस के 20 दिन के अंतर, या पुराने ऋण के खुलासे-को अदालत ने गंभीर नहीं माना और कहा कि याचिकाकर्ता इन बिंदुओं को साबित नहीं कर पाए।
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क्या यह ‘भ्रष्ट आचरण’ है?
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही था।
न्यायालय ने माना कि संपत्ति और आय के स्रोत का सही खुलासा मतदाता का अधिकार है। यदि कोई उम्मीदवार महत्वपूर्ण जानकारी छिपाता है, तो यह मतदाताओं के स्वतंत्र निर्णय को प्रभावित कर सकता है।
अदालत ने कहा कि व्यवसायों और संबंधित खातों का खुलासा न करना तथा कृषि भूमि का अधूरा विवरण देना गंभीर त्रुटि है।
हालांकि सभी आरोप सिद्ध नहीं हुए, परंतु जिन मामलों में गैर-खुलासा साबित हुआ, उन्हें पर्याप्त माना गया।
नामांकन की वैधता पर फैसला
याचिकाकर्ता ने यह भी कहा था कि रिटर्निंग ऑफिसर ने नामांकन गलत तरीके से स्वीकार किया।
इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि नामांकन की स्वीकृति को “अवैध” नहीं माना जा सकता, क्योंकि उस समय उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर अधिकारी ने प्रक्रिया पूरी की थी।
इस मुद्दे पर अदालत ने प्रत्याशी के पक्ष में फैसला दिया।
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अंतिम निर्णय
अदालत ने आंशिक रूप से याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि महत्वपूर्ण संपत्तियों और व्यवसायों का खुलासा न करना कानून के अनुरूप नहीं है।
न्यायमूर्ति कमल ने आदेश में कहा कि ऐसे गैर-खुलासे चुनाव की वैधता को प्रभावित करते हैं।
फलस्वरूप, 140-बागेपल्ली विधानसभा क्षेत्र से चुने गए प्रत्याशी का चुनाव निरस्त कर दिया गया।
हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ता को स्वतः विजयी घोषित नहीं किया।
Case Title: C. Muniraju vs. S.N. Subbareddy & Others
Case No.: Election Petition No. 4 of 2023
Decision Date: 16 February 2026










