मेन्यू
समाचार खोजें...
होमSaved

524 दिन की बिना वेतन छुट्टी पर सवाल: मद्रास हाईकोर्ट ने राजेश कुमार की पदोन्नति बहाल करने का आदेश रद्द किया

तमिलनाडु सरकार एवं अन्य बनाम एम. राजेश कुमार, मद्रास हाईकोर्ट ने 524 दिन की बिना वेतन छुट्टी मामले में कर्मचारी की पदोन्नति बहाल करने का सिंगल जज आदेश रद्द किया।

Vivek G.
524 दिन की बिना वेतन छुट्टी पर सवाल: मद्रास हाईकोर्ट ने राजेश कुमार की पदोन्नति बहाल करने का आदेश रद्द किया

मद्रास हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत कक्ष में सन्नाटा था। मामला था एक सरकारी कर्मचारी की पदोन्नति से जुड़ा-क्या विभाग ने देरी की या कर्मचारी खुद जिम्मेदार था?

सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए डिवीजन बेंच ने एक अहम फैसला सुनाया और सिंगल जज के आदेश को पलट दिया। यह फैसला 12 फरवरी 2026 को सुनाया गया।

Read also:- पुराने आपराधिक मामले के बावजूद नौकरी का हक: गुजरात HC ने भर्ती रोके जाने का आदेश किया रद्द

मामले की पृष्ठभूमि

राजेश कुमार ने 1994 में जूनियर असिस्टेंट के रूप में नौकरी शुरू की थी। बाद में उनका तबादला सिवगंगई ज़िले में हुआ।

उनकी पदोन्नति ग्रामीण कल्याण अधिकारी ग्रेड-I (Rural Welfare Officer Grade-I) के पद पर होनी थी। इसके लिए तीन शर्तें जरूरी थीं:

  1. प्रोबेशन पूरा होना,
  2. भवानिसागर में प्रशिक्षण,
  3. ग्रामीण कल्याण अधिकारी ग्रेड-II के रूप में एक वर्ष की सेवा।

राजेश कुमार ने 31 मई 1999 को विभागीय परीक्षा पास की और उसी दिन उनका प्रोबेशन घोषित हुआ। लेकिन उनका कहना था कि उन्हें प्रशिक्षण और ग्रेड-II पद पर पोस्टिंग देने में विभाग ने देरी की।

सिंगल जज ने उनकी दलील मानते हुए 2022 में आदेश दिया था कि उन्हें वर्ष 2000 की पैनल सूची में शामिल कर "नोटेशनल प्रमोशन" (यानी पिछली तारीख से पदोन्नति के लाभ) दिया जाए।

Read also:- मानसिक रूप से अस्वस्थ बेटी को ज़हर देने का मामला: मद्रास हाईकोर्ट ने माता-पिता की उम्रकैद बरकरार रखी

सरकार की दलील

राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि विभाग की ओर से कोई जानबूझकर देरी नहीं हुई।

उन्होंने कहा, “कर्मचारी ने 1994 से 1998 के बीच 524 दिनों की बिना वेतन छुट्टी ली थी। इसी कारण उनकी प्रोबेशन प्रक्रिया प्रभावित हुई।”

सरकार ने यह भी बताया कि प्रोबेशन घोषित होते ही उन्हें 5 जुलाई 2000 को भवानिसागर प्रशिक्षण भेजा गया और 2001 में ग्रेड-II पद पर तैनात किया गया।

“जब वे सभी पात्रता शर्तें पूरी कर चुके थे, तभी उन्हें 24 अप्रैल 2003 को पदोन्नति दी गई,” सरकार की ओर से कहा गया।

कर्मचारी की दलील

राजेश कुमार की ओर से वकील ने कहा कि विभागीय परीक्षा पास करने और प्रोबेशन घोषित होने के बाद उन्हें तुरंत प्रशिक्षण और पोस्टिंग मिलनी चाहिए थी।

उन्होंने अदालत से कहा, “पोस्टिंग देना पूरी तरह विभाग के अधिकार क्षेत्र में है। यदि प्रशासनिक देरी हुई, तो उसका खामियाजा कर्मचारी को क्यों भुगतना पड़े?”

अदालत की टिप्पणी

जस्टिस सी. कुमारप्पन और जस्टिस एस.एम. सुब्रमण्यम की पीठ ने दोनों पक्षों को विस्तार से सुना।

अदालत ने साफ शब्दों में कहा, “पदोन्नति मौलिक अधिकार नहीं है, लेकिन पदोन्नति पर विचार किया जाना मौलिक अधिकार है।”

पीठ ने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि कर्मचारी ने चार साल की अवधि में 524 दिन बिना वेतन छुट्टी ली थी।

“जो कर्मचारी सेवा में आने के तुरंत बाद इतने लंबे समय तक अनुपस्थित रहा हो, वह विभाग पर देरी का आरोप लगाकर समानता की मांग नहीं कर सकता,” अदालत ने टिप्पणी की।

बेंच ने यह भी कहा कि सरकारी प्रशासन में हर पोस्टिंग गणितीय सटीकता से नहीं हो सकती। यह कई कारकों पर निर्भर करता है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि विभाग की ओर से कोई “असामान्य या दुर्भावनापूर्ण देरी” (abnormal or motivated delay) साबित नहीं हुई।

Read also:- पुराने आपराधिक मामले के बावजूद नौकरी का हक: गुजरात HC ने भर्ती रोके जाने का आदेश किया रद्द

अंतिम निर्णय

विस्तृत विचार के बाद अदालत ने माना कि सिंगल जज का आदेश सही नहीं था।

पीठ ने कहा, “रिकॉर्ड में ऐसा कुछ नहीं है जिससे विभाग की ओर से जानबूझकर देरी सिद्ध हो।”

इसी आधार पर डिवीजन बेंच ने सरकार की अपील स्वीकार करते हुए 14 मार्च 2022 का आदेश रद्द कर दिया।

साथ ही संबंधित याचिका भी बंद कर दी गई।

Case Title: Government of Tamil Nadu & Ors. vs. M. Rajesh Kumar

Case No.: W.A. No. 2616 of 2022

Decision Date: 12 February 2026

Mobile App

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Install App
CourtBook Mobile App

More Stories