आंध्र प्रदेश HC ने गुरुवार को एक अहम आदेश में पशुपालन विभाग के निदेशक की पुनर्नियुक्ति को रद्द कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि रिटायर हो चुके अधिकारी को वैधानिक नियमों के खिलाफ दोबारा उसी पद पर बैठाया नहीं जा सकता।
यह फैसला न्यायमूर्ति Nyapathy Vijay की एकल पीठ ने दो अलग-अलग रिट याचिकाओं पर सुनाया।
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मामला क्या था?
याचिकाएं आंध्र प्रदेश एनिमल हसबेंड्री गजेटेड ऑफिसर्स एसोसिएशन और अन्य संगठनों ने दायर की थीं। उनका कहना था कि 31 जुलाई 2025 को सेवानिवृत्त हुए निदेशक को 6 अगस्त 2025 के सरकारी आदेश के जरिए एक साल के लिए फिर से नियुक्त कर दिया गया।
सरकार ने यह आदेश “प्रशासनिक आवश्यकता” का हवाला देते हुए जारी किया था। पुनर्नियुक्ति G.O.Rt.No.285 दिनांक 06.08.2025 के तहत की गई थी ।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि:
- यह नियुक्ति G.O.Ms.No.1466 (22.08.2024) की गाइडलाइंस के खिलाफ है
- विभागीय प्रमोशन कमेटी (DPC) नहीं बुलाई गई
- सेवा नियमों में निदेशक पद केवल पदोन्नति से भरा जाना है
- सेवानिवृत्ति की आयु पार करने के बाद उसी वैधानिक पद पर बने रहना कानूनन गलत है
अदालत में क्या दलीलें दी गईं?
सरकार की ओर से कहा गया कि पुनर्नियुक्ति प्रक्रिया “बिजनेस रूल्स” के तहत की गई और मुख्यमंत्री की स्वीकृति ली गई। यह भी बताया गया कि मामला स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष रखा गया था, लेकिन प्रशासनिक आपात स्थिति के कारण सर्कुलेशन के जरिए स्वीकृति ली गई।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने यह भी तर्क दिया कि “क्वो वारंटो” की रिट तभी जारी हो सकती है जब नियुक्ति पूरी तरह अवैध हो या व्यक्ति अयोग्य हो।
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अदालत की टिप्पणी: “नियमों से बाहर कोई रास्ता नहीं”
1. क्या याचिकाकर्ता रिट दायर कर सकते थे?
अदालत ने कहा कि क्वो वारंटो याचिका में लोकस स्टैंडी (अधिकार) के नियम ढीले होते हैं। अगर कोई व्यक्ति सार्वजनिक पद पर बिना वैध अधिकार बैठा है, तो कोई भी नागरिक अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।
पीठ ने स्पष्ट कहा, “अदालत का दायित्व है कि सार्वजनिक पद पर अवैध कब्जा न होने दे।”
2. क्या G.O.Ms.No.1466 की प्रक्रिया का पालन हुआ?
अदालत ने रिकॉर्ड देखा और पाया कि विभाग की ओर से ऐसी कोई स्वतंत्र अनुशंसा नहीं थी जिसमें कहा गया हो कि पुनर्नियुक्ति ‘अनिवार्य’ है। आदेश मुख्य रूप से स्वयं अधिकारी के अनुरोध पर आधारित था ।
न्यायालय ने कहा, “अपवाद की व्यवस्था विभाग की वास्तविक आवश्यकता के लिए है, न कि किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत इच्छा के लिए।”
स्क्रीनिंग कमेटी को दरकिनार करने का औचित्य रिकॉर्ड में स्पष्ट नहीं था।
3. सेवा नियम क्या कहते हैं?
अदालत ने 1996 के ए.पी. स्टेट एनिमल हसबेंड्री सर्विस रूल्स का हवाला दिया। नियम 3 के अनुसार निदेशक पद केवल अतिरिक्त निदेशक से पदोन्नति द्वारा भरा जा सकता है ।
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पीठ ने टिप्पणी की, “जब वैधानिक नियम नियुक्ति की एक ही विधि बताते हैं, तो कार्यपालिका किसी अन्य तरीके से नियुक्ति नहीं कर सकती।”
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि सेवा शर्तें पूरी तरह नियमों से संचालित होती हैं और कार्यपालिका को उनसे बाहर जाने का अधिकार नहीं है।
सेवानिवृत्ति कानून पर भी स्पष्टता
अदालत ने ए.पी. पब्लिक एम्प्लॉयमेंट (रेगुलेशन ऑफ एज ऑफ सुपरएनुएशन) एक्ट, 1984 का उल्लेख किया, जिसके अनुसार सरकारी कर्मचारी 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं।
न्यायालय ने कहा कि किसी वैधानिक पद पर, जो सेवा नियमों से शासित है, सेवानिवृत्ति के बाद बने रहना कानून के विपरीत है ।
पीठ ने स्पष्ट किया कि रिटायर अधिकारी को अधिकतम सलाहकार या विशेष अधिकारी जैसे गैर-वैधानिक पद पर अनुबंध के आधार पर रखा जा सकता है, लेकिन उसी नियमित पद पर नहीं।
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अंतिम निर्णय
अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि:
- पुनर्नियुक्ति प्रक्रिया G.O.Ms.No.1466 के अनुरूप नहीं थी
- सेवा नियमों के खिलाफ नियुक्ति की गई
- सेवानिवृत्ति अधिनियम की भावना का उल्लंघन हुआ
इसके बाद अदालत ने क्वो वारंटो की रिट जारी करते हुए पुनर्नियुक्ति को निरस्त कर दिया ।
दोनों रिट याचिकाएं स्वीकार कर ली गईं। खर्च के संबंध में कोई आदेश नहीं दिया गया।
Case Title: Andhra Pradesh Animal Husbandary Gazetted Officers Association vs State of Andhra Pradesh & Ors.
Case No.: W.P. Nos. 24508 & 22832 of 2025
Decision Date: 29 January 2026










