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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: क्रिकेट संघों पर 'नित्या' नियम लागू नहीं, हाईकोर्ट का आदेश आंशिक रद्द

तिरुचिरापल्ली जिला क्रिकेट संघ बनाम अन्ना नगर क्रिकेट क्लब और अन्य। सुप्रीम कोर्ट ने जिला क्रिकेट संघ पर ‘एस. नित्या’ फैसले के नियम लागू करने से इनकार किया, हाईकोर्ट का आदेश आंशिक रद्द।

Vivek G.
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: क्रिकेट संघों पर 'नित्या' नियम लागू नहीं, हाईकोर्ट का आदेश आंशिक रद्द

नई दिल्ली में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने साफ कर दिया कि एथलेटिक्स से जुड़े फैसले को सीधे तौर पर क्रिकेट संघों पर लागू नहीं किया जा सकता। मामला था The Tiruchirappalli District Cricket Association और Anna Nagar Cricket Club के बीच चल रहे विवाद का, जो मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था।

13 फरवरी 2026 को जस्टिस पामिडिघंटम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट के आदेश को आंशिक रूप से रद्द कर दिया।

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मामला क्या था?

विवाद की शुरुआत दो अलग-अलग याचिकाओं से हुई थी।

पहली याचिका में एक क्रिकेट क्लब ने जिला क्रिकेट संघ में सदस्यता, वोटिंग अधिकार और टूर्नामेंट में भागीदारी की मांग की थी। हाईकोर्ट ने क्लब के पक्ष में फैसला देते हुए उसे सदस्यता और वोटिंग अधिकार देने की बात कही।

दूसरी याचिका एक पूर्व पदाधिकारी ने दायर की थी। उन्होंने मांग की थी कि संघ में निष्पक्ष चुनाव हों और संविधान में बदलाव कर उसे पारदर्शी बनाया जाए। इसके लिए हाईकोर्ट ने अपने पुराने फैसले - एस. नित्या मामले - का हवाला दिया।

‘एस. नित्या’ मामला और विवाद

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में एथलेटिक्स से जुड़े एक फैसले का जिक्र किया था, जिसमें निर्देश दिया गया था कि खेल संघों में 75% सदस्य “प्रख्यात खिलाड़ी” हों और प्रमुख पद भी खिलाड़ियों के पास ही हों।

जिला क्रिकेट संघ ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि यह नियम क्रिकेट पर लागू नहीं होता। उनका कहना था कि क्रिकेट के लिए पहले से ही Board of Control for Cricket in India (BCCI) के संबंध में सुप्रीम कोर्ट का फैसला मौजूद है, जिसमें ऐसे किसी 75% नियम की बात नहीं है।

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अदालत की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा, “नित्या मामले के निर्देश एथलेटिक्स प्रशासन से जुड़े थे। उन्हें बिना सोचे-समझे क्रिकेट संघों पर लागू नहीं किया जा सकता।”

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि BCCI के मामले में जो संविधान स्वीकृत हुआ था, उसमें जिला स्तर पर 75% खिलाड़ियों की अनिवार्यता नहीं थी।

बेंच ने यह भी कहा, “जब तक राज्य क्रिकेट संघों की मूल संरचना में दखल नहीं होता, तब तक अनुच्छेद 19(1)(c) के अधिकारों का उल्लंघन नहीं माना जा सकता।”

क्या BCCI का संविधान जिला संघों पर लागू होगा?

सुनवाई के दौरान यह तर्क भी आया कि जिला क्रिकेट संघों को BCCI के संविधान के अनुरूप अपने नियम बदलने चाहिए।

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि BCCI के फैसले में जिला संघों को अपने नियम उसी ढांचे में ढालने का कोई सीधा निर्देश नहीं था।

हालांकि, बेंच ने यह जरूर जोड़ा कि खेल संस्थाओं को पारदर्शिता और पेशेवर तरीके अपनाने चाहिए। कोर्ट ने कहा, “खेल राष्ट्रीय जीवन का अहम हिस्सा हैं। इन्हें पारदर्शी और सभी के लिए सुलभ बनाना जरूरी है।”

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लंबित विवादों पर रुख

सदस्यता और जीवन सदस्य (लाइफ मेंबर) से जुड़े कुछ मामले अभी मद्रास हाईकोर्ट और रजिस्ट्रार के समक्ष लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन मुद्दों पर टिप्पणी करने से परहेज किया।

बेंच ने कहा कि ये विवाद संबंधित प्राधिकरण जल्द से जल्द निपटाएं ताकि संघ के चुनाव समय पर हो सकें।

अंतिम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने अपील को आंशिक रूप से स्वीकार किया।

हाईकोर्ट के उस हिस्से को रद्द कर दिया गया जिसमें ‘एस. नित्या’ फैसले के निर्देशों को जिला क्रिकेट संघ पर लागू किया गया था।

साथ ही, हाईकोर्ट और संबंधित प्राधिकरणों को लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा करने का निर्देश दिया गया, ताकि चुनाव प्रक्रिया में देरी न हो।

Case Title: The Tiruchirappalli District Cricket Association v. Anna Nagar Cricket Club & Anr.

Case No.: Civil Appeal arising out of SLP (C) Nos. 26653-26654 of 2024

Decision Date: 13 February 2026

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