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दिल्ली हाईकोर्ट ने वायुसेना के पूर्व वारंट ऑफिसर को दी राहत, हाई ब्लड प्रेशर पर मिलेगी दिव्यांगता पेंशन

Union of India vs. 627281 Ex MWO (HFO) Tejpal Singh - दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र की याचिका खारिज करते हुए सेवानिवृत्त वायु सेना अधिकारी की विकलांगता पेंशन को बरकरार रखा और कहा कि जीवनशैली संबंधी बीमारी के दावे के लिए ठोस कारणों की आवश्यकता है।

Shivam Y.
दिल्ली हाईकोर्ट ने वायुसेना के पूर्व वारंट ऑफिसर को दी राहत, हाई ब्लड प्रेशर पर मिलेगी दिव्यांगता पेंशन

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की याचिका खारिज करते हुए एक पूर्व वायुसेना अधिकारी को बड़ी राहत दी है। अदालत ने साफ कहा कि यदि मेडिकल बोर्ड किसी बीमारी को सैन्य सेवा से असंबंधित मानता है, तो उसे ठोस और स्पष्ट कारण देने होंगे। केवल सामान्य या रूढ़ बयान के आधार पर दिव्यांगता पेंशन रोकी नहीं जा सकती।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 627281 Ex MWO (HFO) तेजपाल सिंह से जुड़ा है, जिन्होंने भारतीय वायुसेना में 1981 में सेवा जॉइन की थी। करीब 37 वर्षों की सेवा के बाद उन्हें 31 मार्च 2019 को सेवानिवृत्त किया गया।
सेवा के दौरान उन्हें प्राइमरी हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) और हृदय से जुड़ी अन्य समस्याएं पाई गईं। रिलीज मेडिकल बोर्ड ने उनकी दिव्यांगता 30% आंकी, लेकिन इसे सैन्य सेवा से जुड़ा मानने से इनकार कर दिया।

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इसके खिलाफ तेजपाल सिंह ने सशस्त्र बल अधिकरण (AFT) का रुख किया, जिसने 2023 में उन्हें दिव्यांगता पेंशन देने का आदेश दिया।

केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा कि यह बीमारी “लाइफस्टाइल डिसऑर्डर” है और शांति क्षेत्र में उत्पन्न हुई, इसलिए न तो यह सैन्य सेवा के कारण हुई और न ही उससे बढ़ी। सरकार का यह भी तर्क था कि 2008 के नियमों के तहत अब स्वतः अनुमान (presumption) लागू नहीं होता।

कोर्ट की टिप्पणियां

न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति मनीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की पीठ ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।

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अदालत ने कहा कि,

“यदि भर्ती के समय कोई बीमारी दर्ज नहीं थी, तो यह माना जाएगा कि सेवा के दौरान उत्पन्न बीमारी का संबंध सैन्य सेवा से है, जब तक कि मेडिकल बोर्ड इसके विपरीत ठोस कारण न दे।”

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि मेडिकल बोर्ड ने यह बताने के लिए कोई स्पष्ट कारण नहीं दिया कि उच्च रक्तचाप को केवल जीवनशैली से जोड़कर क्यों देखा गया।
पीठ ने कहा कि जीवनशैली हर व्यक्ति में अलग होती है और इसे आधार बनाकर पेंशन से इनकार नहीं किया जा सकता।

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हाईकोर्ट ने दो टूक कहा कि मेडिकल बोर्ड का दायित्व है कि वह बीमारी और सैन्य सेवा के बीच संबंध न होने की स्थिति में व्यक्तिगत, तथ्यात्मक और तर्कसंगत कारण रिकॉर्ड करे।
अदालत ने कहा कि बिना कारणों के दिए गए निष्कर्ष कानून की कसौटी पर टिक नहीं सकते।

फैसला

सभी तथ्यों और कानून की स्थिति को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर दी।

अदालत ने Armed Forces Tribunal के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें तेजपाल सिंह को 30% दिव्यांगता को 50% मानते हुए आजीवन दिव्यांगता पेंशन और बकाया भुगतान का निर्देश दिया गया था।

Case Title: Union of India vs. 627281 Ex MWO (HFO) Tejpal Singh

Case Number: W.P.(C) 749/2026

Date of Decision: 19 January 2026

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