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दो साल की हिरासत असंवैधानिक: केरल हाईकोर्ट ने श्रीलंकाई भाई-बहन को देश छोड़ने की अनुमति दी

थेनु जयप्रियन और अन्य बनाम विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी और अन्य - केरल उच्च न्यायालय ने श्रीलंका के भाई-बहनों को घर वापसी के लिए पारगमन में हिरासत में रखना अवैध करार दिया, और तत्काल निकास परमिट जारी करने और स्वदेश वापसी का आदेश दिया।

Shivam Y.
दो साल की हिरासत असंवैधानिक: केरल हाईकोर्ट ने श्रीलंकाई भाई-बहन को देश छोड़ने की अनुमति दी

केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी अपराध में शामिल न होने के बावजूद किसी व्यक्ति को लंबे समय तक हिरासत में रखना संविधान के तहत जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है। अदालत ने दो श्रीलंकाई नागरिकों एक युवक और उसकी नाबालिग बहन को भारत छोड़कर श्रीलंका लौटने की अनुमति दी, जो पिछले दो वर्षों से केरल के एक ट्रांजिट होम में रह रहे थे

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता श्रीलंका के नागरिक हैं और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा दर्ज दो मामलों में आरोपित माता-पिता के बच्चे हैं। माता-पिता की गिरफ्तारी के दौरान दोनों बच्चों को भी हिरासत में लिया गया था। इसके बाद उन्हें कोल्लम जिले के पथनापुरम स्थित गांधीभवन इंटरनेशनल ट्रस्ट के ट्रांजिट होम में रखा गया।

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याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि वे किसी भी आपराधिक मामले में आरोपी नहीं हैं, फिर भी दो साल से अधिक समय तक उनकी निरंतर हिरासत असंवैधानिक है। उन्होंने अदालत से भारत से बाहर जाने और श्रीलंका लौटने के लिए आवश्यक दस्तावेज़ जारी करने का निर्देश देने की मांग की।

सरकार का पक्ष

विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी (FRRO) की ओर से अदालत को बताया गया कि दोनों के पास वैध श्रीलंकाई पासपोर्ट हैं, लेकिन उनका वीज़ा अक्टूबर 2022 में समाप्त हो चुका है। यह भी कहा गया कि पहले एक जमानत आदेश के तहत उन्हें ट्रांजिट होम में रहने का निर्देश दिया गया था।

सुनवाई के दौरान भारत सरकार की ओर से पेश डिप्टी सॉलिसिटर जनरल ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी को अब याचिकाकर्ताओं की किसी भी जांच या पूछताछ के लिए आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कोई अन्य एजेंसी उन्हें नहीं चाहती, तो उनके देश छोड़ने पर सरकार को कोई आपत्ति नहीं है।

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अदालत की टिप्पणियां

न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस ने सुनवाई के दौरान कहा कि किसी भी व्यक्ति को बिना किसी अपराध के लंबे समय तक हिरासत में रखना स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने टिप्पणी की,
“याचिकाकर्ताओं की निरंतर हिरासत उनके जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से वंचित करने के समान है।”

अदालत ने यह भी नोट किया कि जब जांच एजेंसियों को उनकी आवश्यकता नहीं है, तो उन्हें भारत में रोके रखने का कोई कानूनी आधार नहीं बचता।

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फैसला

केरल हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ताओं के लिए आवश्यक एग्ज़िट परमिट और अन्य यात्रा दस्तावेज़ जारी करने की प्रक्रिया तुरंत शुरू करें। अदालत ने स्पष्ट किया कि आवेदन प्राप्त होने के बाद अधिकतम दो सप्ताह के भीतर सभी औपचारिकताएं पूरी की जानी चाहिए, ताकि वे जल्द से जल्द श्रीलंका लौट सकें।

इसके साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि यदि उनके देश छोड़ने में कोई बाधा आती है, तो संबंधित अधिकारी अपने स्तर पर उसे दूर करें। इस आदेश के साथ ही याचिका का निपटारा कर दिया गया।

Case Title: Thenu Jeyapriyan & Anr. v. Foreigners Regional Registration Officer & Anr.

Case Number: WP(C) No. 44831 of 2025

Date of Judgment: 16 January 2026

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