सुप्रीम कोर्ट ने हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (HMDA) और साइबराबाद एक्सप्रेसवे लिमिटेड के बीच लंबे समय से चले आ रहे मध्यस्थता विवाद में अहम आदेश सुनाया है। कोर्ट ने निचली अदालत की कार्यवाही पर आंशिक रोक लगाते हुए स्पष्ट किया कि जब तक अपील लंबित है, तब तक निष्पादन की कार्रवाई सीमित दायरे में ही होगी।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद वर्ष 2007 में हुए एक कंसेशन एग्रीमेंट से जुड़ा है, जिसके तहत हैदराबाद में 8-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी साइबराबाद एक्सप्रेसवे लिमिटेड को दी गई थी।
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समय के साथ परियोजना में भुगतान, बोनस एन्युटी और अनुबंधीय दायित्वों को लेकर मतभेद उभरे।
2017 में कंपनी ने मध्यस्थता का सहारा लिया। इसके बाद गठित ट्रिब्यूनल ने 27 फरवरी 2019 को HMDA को करीब ₹140.89 करोड़, अतिरिक्त ₹39.50 करोड़ बोनस एन्युटी, ब्याज और ₹20 लाख लागत देने का आदेश दिया।
इस अवॉर्ड को लागू कराने के लिए हैदराबाद की कमर्शियल कोर्ट में एक्जीक्यूशन पिटीशन दाखिल की गई।
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
HMDA ने मध्यस्थता अधिनियम की धारा 34 के तहत अवॉर्ड को चुनौती दी, लेकिन राहत नहीं मिली। इसके बाद धारा 37 के तहत अपील दाखिल की गई, जो फिलहाल तेलंगाना हाईकोर्ट में लंबित है।
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इस बीच, हाईकोर्ट ने शर्तों के साथ स्टे दिया था कि HMDA को 50 प्रतिशत राशि जमा करनी होगी। जब यह राशि जमा नहीं की गई, तो एजेंसी ने कथित धोखाधड़ी का हवाला देते हुए आदेश वापस लेने की मांग की, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया।
इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
कोर्ट की अहम टिप्पणियां
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची शामिल थे, ने साफ कहा कि-
“जब अपील पहले से हाईकोर्ट में लंबित है, तब इस स्तर पर तथ्यों के गुण-दोष पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।”
कोर्ट ने यह भी कहा कि कथित धोखाधड़ी से जुड़े सभी तर्क पहले ही हाईकोर्ट के समक्ष लंबित हैं और वहीं उनका फैसला होना चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट का अंतिम आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने संतुलित रुख अपनाते हुए निर्देश दिया कि-
- HMDA को 50% राशि के बराबर बैंक गारंटी दो सप्ताह में देनी होगी
- जब तक हाईकोर्ट में धारा 37 की अपील का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक
एक्जीक्यूशन कार्यवाही स्थगित रहेगी - यदि बैंक गारंटी नहीं दी गई, तो निचली अदालत को कार्रवाई की पूरी छूट होगी
- हाईकोर्ट से कहा गया है कि वह तीन महीने के भीतर अपील का निपटारा करे
- पहले लगाई गई ₹5 लाख की लागत को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया
अदालत ने अंत में स्पष्ट किया कि उसका यह आदेश केवल अंतरिम व्यवस्था के लिए है और मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं मानी जाएगी।
Case Title: Hyderabad Metropolitan Development Authority vs Cyberabad Expressway Ltd.
Case No.: Civil Appeal arising out of SLP (C) Diary No. 29495/2025
Decision Date: 23 January 2026










