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सुप्रीम कोर्ट ने ITC मौर्य सैलून केस में ₹2 करोड़ मुआवज़ा घटाया, सिर्फ ₹25 लाख पर लगाई मुहर

आईटीसी लिमिटेड बनाम आशना रॉय, सुप्रीम कोर्ट ने ITC Maurya सैलून केस में ₹2 करोड़ मुआवज़ा रद्द कर ₹25 लाख तय किया, सबूतों की कमी को बताया कारण।

Vivek G.
सुप्रीम कोर्ट ने ITC मौर्य सैलून केस में ₹2 करोड़ मुआवज़ा घटाया, सिर्फ ₹25 लाख पर लगाई मुहर

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक असामान्य लेकिन चर्चित उपभोक्ता विवाद का अंत हुआ। मामला दिल्ली के ITC Maurya होटल के ब्यूटी सैलून में हुए हेयरकट से जुड़ा था। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि भारी-भरकम मुआवज़ा केवल दावों के आधार पर नहीं, बल्कि ठोस सबूतों पर ही दिया जा सकता है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद 12 अप्रैल 2018 का है, जब शिकायतकर्ता ने ITC Maurya, नई दिल्ली के सैलून में हेयरकट कराया। उनका आरोप था कि गलत तरीके से बाल काटे गए, जिससे उन्हें मानसिक आघात हुआ और उनका करियर प्रभावित हुआ।

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इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) में शिकायत दर्ज की। आयोग ने ITC लिमिटेड को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए ₹2 करोड़ का मुआवज़ा तय किया था।

पहला दौर: सुप्रीम कोर्ट की दखल

ITC ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। फरवरी 2023 में अदालत ने सेवा में कमी के निष्कर्ष को तो बरकरार रखा, लेकिन मुआवज़े की राशि पर सवाल उठाए।
पीठ ने कहा था कि शिकायतकर्ता ने नुकसान के समर्थन में पर्याप्त सामग्री पेश नहीं की है। इसलिए मुआवज़े की गणना के लिए मामला दोबारा आयोग को भेजा गया।

दूसरा दौर: आयोग का फिर वही फैसला

मामला वापस मिलने के बाद शिकायतकर्ता ने अपना दावा बढ़ाकर ₹5.20 करोड़ कर दिया और कुछ दस्तावेज़ पेश किए। आयोग ने दोबारा ₹2 करोड़ का मुआवज़ा तय कर दिया, साथ ही 9% ब्याज भी जोड़ दिया।
यहीं से मामला फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

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सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणियाँ

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने दस्तावेज़ों की प्रकृति पर गहरी नाराज़गी जताई।
पीठ ने कहा,

“इतने बड़े मुआवज़े के लिए केवल फोटोकॉपी दस्तावेज़ों पर भरोसा नहीं किया जा सकता।”

अदालत ने नोट किया कि पेश किए गए कागज़ों के मूल दस्तावेज़ नहीं लाए गए, न ही उनके लेखकों को गवाही के लिए बुलाया गया। इससे ITC को जिरह का मौका नहीं मिला।

सबूतों पर अदालत की राय

अदालत ने कहा कि उपभोक्ता मंचों में सख़्त साक्ष्य कानून लागू न भी हो, फिर भी प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन ज़रूरी है।

पीठ ने साफ किया कि करोड़ों के दावे “अनुमान, भावनाओं या केवल कहने भर से” स्वीकार नहीं किए जा सकते। नुकसान और सेवा में कमी के बीच सीधा संबंध दिखाना आवश्यक है।

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अंतिम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने आयोग के आदेश में संशोधन करते हुए ₹2 करोड़ के मुआवज़े को अनुचित ठहराया।

अदालत ने निर्देश दिया कि शिकायतकर्ता को केवल वही ₹25 लाख मिलेंगे, जो पहले ही ITC द्वारा जमा कराए जा चुके थे। इसके साथ ही मामला यहीं समाप्त कर दिया गया।

Case Title: ITC Limited vs Aashna Roy

Case No.: Civil Appeal No. 3318 of 2023

Decision Date: 6 February 2026

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