सुप्रीम कोर्ट ने चेक बाउंस से जुड़े एक मामले में अहम हस्तक्षेप करते हुए निचली अदालत और हाई कोर्ट के आदेशों को पलट दिया। अदालत ने कहा कि केवल अनुपस्थिति के आधार पर शिकायत को खत्म करना न्याय के हित में नहीं था। कोर्ट ने शिकायतकर्ता को राहत देते हुए मामला फिर से बहाल करने का निर्देश दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से जुड़ा है, जहां शिकायतकर्ता यतेंद्र सिंह ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 138 के तहत चेक बाउंस की शिकायत दर्ज कराई थी।
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शिकायत संख्या 1125/2022 को अतिरिक्त न्यायालय संख्या-2, गाजियाबाद ने 3 मार्च 2023 को डिफॉल्ट यानी शिकायतकर्ता की अनुपस्थिति के कारण खारिज कर दिया था। इसके बाद शिकायतकर्ता ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन 24 सितंबर 2025 को हाई कोर्ट ने भी मामले में दखल देने से इनकार कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में अपील की सुनवाई न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने की।
अपीलकर्ता की ओर से दलील दी गई कि शिकायत को तकनीकी आधार पर खारिज किया गया और इससे न्याय का उद्देश्य पूरा नहीं होता। दूसरी ओर, प्रतिवादी पक्ष ने हाई कोर्ट के आदेश का समर्थन किया।
कोर्ट का अवलोकन
रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हाई कोर्ट का रुख सही नहीं था।
पीठ ने टिप्पणी की,
“न्याय के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए, हम मानते हैं कि हाई कोर्ट को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए था।”
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि शिकायत को केवल गैर-हाजिरी के आधार पर समाप्त कर देना एक कठोर कदम है, खासकर तब जब मामला वित्तीय लेन-देन से जुड़ा हो।
अदालत का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के 24 सितंबर 2025 के आदेश और ट्रायल कोर्ट के 3 मार्च 2023 के आदेश-दोनों को रद्द कर दिया।
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अदालत ने निर्देश दिया कि शिकायत संख्या 1125/2022 को दोबारा उसी अदालत की फाइल में बहाल किया जाए और मामले की सुनवाई कानून के अनुसार आगे बढ़ाई जाए।
इसके साथ ही अपील का निपटारा कर दिया गया और लंबित सभी अर्जियां स्वतः समाप्त मानी गईं।
Case Title: Yatendra Singh vs State of U.P. & Another
Case No.: Criminal Appeal arising out of SLP (Crl.) No. 1205 of 2026
Decision Date: 30 January 2026










