इलाहाबाद हाईकोर्ट में CLAT-2026 परीक्षा को लेकर एक अहम सुनवाई हुई, जिसमें एक नाबालिग अभ्यर्थी की याचिका पर कोर्ट ने Consortium of National Law Universities के फैसलों की गहन जांच की। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विशेषज्ञ समिति की राय को बिना कारण खारिज नहीं किया जा सकता। यह फैसला हजारों CLAT उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
केस की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता अवनीश गुप्ता (नाबालिग) ने CLAT-2026 परीक्षा दी थी। परीक्षा 7 दिसंबर 2025 को गाजियाबाद स्थित SRM IST केंद्र पर आयोजित हुई थी।
परीक्षा के बाद जारी प्रोविजनल आंसर की पर आपत्ति दर्ज करने का मौका दिया गया। याचिकाकर्ता ने प्रश्न संख्या 6, 9 और 13 (बुकलेट-C) को लेकर आपत्ति दाखिल की और निर्धारित शुल्क भी जमा किया।
हालांकि, 16 दिसंबर 2025 को जारी फाइनल आंसर की में इन आपत्तियों को स्वीकार नहीं किया गया। याचिकाकर्ता का कहना था कि उसके सही उत्तरों को गलत मान लिया गया, जिससे उसकी रैंक प्रभावित हुई और मनपसंद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में प्रवेश का अवसर छिन गया।
याचिकाकर्ता की दलील
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि ये तीनों प्रश्न लॉजिकल रीजनिंग से जुड़े थे और सामान्य समझ से भी उनके उत्तर सही साबित होते हैं।
खास तौर पर प्रश्न संख्या 9 को लेकर यह तर्क दिया गया कि विषय विशेषज्ञ समिति ने साफ तौर पर माना था कि इस प्रश्न के दो विकल्प - B और D - सही हैं। इसके बावजूद ओवरसाइट कमेटी ने बिना कोई कारण बताए सिर्फ विकल्प B को सही मान लिया।
याचिकाकर्ता ने कहा, “मेरी आपत्तियों पर विचार तो हुआ, लेकिन उन्हें तर्क के बिना खारिज कर दिया गया।”
कोर्ट का अवलोकन
जस्टिस विवेक सरन ने सबसे पहले यह स्पष्ट किया कि गाजियाबाद में परीक्षा देने के कारण इलाहाबाद हाईकोर्ट को इस मामले में क्षेत्राधिकार (territorial jurisdiction) प्राप्त है।
इसके बाद कोर्ट ने परीक्षा मूल्यांकन में न्यायिक दखल की सीमाओं पर चर्चा की। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि आम तौर पर कोर्ट को विशेषज्ञों के काम में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
लेकिन इस मामले में एक अहम चूक सामने आई।
कोर्ट ने टिप्पणी की,
“कारण किसी भी निर्णय की आत्मा होते हैं। बिना कारण दिया गया फैसला न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।”
अदालत ने पाया कि जब विषय विशेषज्ञ समिति ने प्रश्न संख्या 9 के लिए दो उत्तर सही माने थे, तब ओवरसाइट कमेटी द्वारा उस राय को पलटने के पीछे कोई ठोस कारण रिकॉर्ड पर नहीं था।
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निर्णय
हाईकोर्ट ने प्रश्न संख्या 9 (बुकलेट-C / प्रश्न 91 बुकलेट-A) को लेकर ओवरसाइट कमेटी के फैसले को रद्द कर दिया।
अदालत ने विशेषज्ञ समिति की राय को बरकरार रखते हुए निर्देश दिया कि विकल्प B और D - दोनों को सही उत्तर माना जाए।
कोर्ट ने Consortium of National Law Universities को आदेश दिया कि:
- संबंधित प्रश्न के लिए सभी अभ्यर्थियों को उचित अंक दिए जाएं
- CLAT-2026 की मेरिट लिस्ट को संशोधित कर दोबारा प्रकाशित किया जाए
- यह प्रक्रिया एक महीने के भीतर पूरी की जाए
हालांकि, अदालत ने यह भी साफ किया कि पहले काउंसलिंग राउंड में जिन छात्रों का दाखिला हो चुका है, उन्हें परेशान नहीं किया जाएगा। आगे की काउंसलिंग संशोधित मेरिट लिस्ट के आधार पर होगी।
इसी के साथ याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया गया और लागत (costs) का कोई आदेश नहीं दिया गया।
Case Title: Avneesh Gupta (Minor) vs Consortium of National Law Universities
Case No.: Writ-C No. 45517 of 2025
Decision Date: 03 February 2026










