नई दिल्ली में आज सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से जुड़े कानून के पालन पर राज्यों की ढिलाई पर चिंता जताई। मामला Aureliano Fernandes v. State of Goa & Ors. से जुड़ा है, जिसमें 2013 के POSH कानून के अनुपालन की निगरानी की जा रही है। आदेश में दर्ज कार्यवाही के अनुसार
मामले की पृष्ठभूमि
एमिकस क्यूरी ने अदालत को बताया कि 6 जनवरी 2026 के आदेश के बाद भी कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अनुपालन का हलफनामा दाखिल नहीं किया। गोवा, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मिजोरम, पुडुचेरी, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल अभी बाकी हैं।
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कोर्ट की टिप्पणी
पीठ ने स्पष्ट कहा, “राज्य समय पर अपना दायित्व निभाएं।” अदालत ने सभी लंबित राज्यों को चार हफ्तों का अंतिम समय दिया।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की ओर से बताया गया कि हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और दादरा एवं नगर हवेली ने अभी तक ज़िला अधिकारियों की जानकारी नहीं दी है, जिन्हें 2013 के कानून के तहत नियुक्त किया जाना जरूरी है। इस पर कोर्ट ने दो हफ्तों में विवरण देने का निर्देश दिया।
अदालत ने यह भी कहा कि जिन राज्यों ने अभी तक नोडल अधिकारी नियुक्त नहीं किए हैं, वे नाम और संपर्क विवरण साझा करें। “जानकारी NALSA की वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाए,” पीठ ने निर्देश दिया।
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फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने सभी लंबित हलफनामे अगली तारीख से पहले दाखिल करने को कहा और मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च 2026 तय की। संबंधित रिट याचिका को भी उसी दिन के लिए स्थगित कर दिया गया।
Case Title: Aureliano Fernandes vs. State of Goa & Ors.
Case No.: MA Diary No. 22553/2023 (arising out of C.A. No. 2482/2014)
Case Type: Miscellaneous Application
Decision Date: 10 February 2026










