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SC ने डॉ. आनंद राय को SC/ST एक्ट में दी बड़ी राहत, कहा- 'जाति जानकारी का कोई सबूत नहीं'

डॉ. आनंद राय बनाम मध्य प्रदेश राज्य एवं अन्य। सुप्रीम कोर्ट ने डॉ. आनंद राय मामले में SC/ST एक्ट की धाराएं रद्द कीं, कहा- जाति की जानकारी का कोई प्रथम दृष्टया सबूत नहीं।

Vivek G.
SC ने डॉ. आनंद राय को SC/ST एक्ट में दी बड़ी राहत, कहा- 'जाति जानकारी का कोई सबूत नहीं'

नई दिल्ली की अदालत कक्ष में मंगलवार को हल्की खामोशी थी, जब सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने डॉ. आनंद राय से जुड़े बहुचर्चित मामले में अपना फैसला सुनाया। मामला मध्य प्रदेश के रतलाम में हुई एक घटना से जुड़ा था, जिसमें भीड़ द्वारा सरकारी काम में बाधा और पथराव के आरोप लगे थे।

लेकिन सवाल यह था-क्या इस घटना में अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (SC/ST Act) की धाराएं भी लागू होती हैं?

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पृष्ठभूमि: क्या था मामला

15 नवंबर 2022 को रतलाम जिले के बिलपांक थाना क्षेत्र में बिरसा मुंडा की प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम के दौरान हंगामे की शिकायत दर्ज हुई। आरोप था कि कुछ लोगों ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की गाड़ियों को रोका, पथराव किया और पुलिसकर्मियों से धक्का-मुक्की की।

चार्जशीट में डॉ. आनंद राय का नाम भी शामिल था। उन पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराओं के साथ-साथ SC/ST Act की धारा 3(2)(v) और 3(2)(va) के तहत भी आरोप लगाए गए थे।

ट्रायल कोर्ट ने कुछ धाराओं में राहत दी, लेकिन SC/ST Act की धाराएं बरकरार रखीं। हाई कोर्ट ने भी इस फैसले को कायम रखा। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य प्रश्न यही था कि क्या रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस आधार है जिससे यह माना जाए कि आरोपी को यह “ज्ञान” था कि पीड़ित अनुसूचित जाति या जनजाति से है?

वरिष्ठ अधिवक्ता की ओर से दलील दी गई कि एफआईआर और गवाहों के बयानों में कहीं भी जातिसूचक शब्दों के प्रयोग या जाति की जानकारी का उल्लेख नहीं है।

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अदालत की अहम टिप्पणी

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की बेंच ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए कहा:

“जब गवाहों के बयानों में कहीं भी जातिसूचक अपमान का उल्लेख नहीं है, तो केवल संदेह के आधार पर SC/ST एक्ट की धाराएं नहीं लगाई जा सकतीं।”

अदालत ने यह भी कहा कि किसी भी आरोपी पर SC/ST Act लागू करने के लिए यह जरूरी है कि उसे पीड़ित की जाति की जानकारी हो और अपराध उसी आधार पर किया गया हो।

बेंच ने साफ कहा:

“ज्ञान का अभाव होने पर आरोप टिक नहीं सकते। संदेह और ‘गंभीर संदेह’ में फर्क करना जरूरी है।”

हाई कोर्ट की भूमिका पर टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पाया कि हाई कोर्ट ने अपील की सुनवाई करते समय SC/ST Act की धाराओं पर स्वतंत्र रूप से विचार नहीं किया।

बेंच ने कहा कि SC/ST Act की धारा 14A के तहत दायर अपील “फर्स्ट अपील” होती है, जिसमें हाई कोर्ट को तथ्यों और कानून-दोनों पर स्वतंत्र समीक्षा करनी चाहिए।

फैसले में अदालत ने विस्तार से बताया कि आरोप तय करने के चरण पर कोर्ट को केवल यह देखना होता है कि क्या प्रथम दृष्टया (prima facie) मामला बनता है।

लेकिन यदि आरोप के आवश्यक तत्व ही रिकॉर्ड पर नहीं दिखते, तो आरोपी को मुकदमे की लंबी प्रक्रिया में झोंकना न्यायसंगत नहीं है।

“डिस्चार्ज कोई तकनीकी राहत नहीं, बल्कि एक आवश्यक सुरक्षा है,” अदालत ने टिप्पणी की।

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अंतिम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने डॉ. आनंद राय के खिलाफ SC/ST Act की धाराओं को रद्द कर दिया।

हालांकि, IPC की अन्य धाराओं में ट्रायल जारी रहेगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय केवल SC/ST Act की धाराओं तक सीमित है और बाकी आरोपों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

इस प्रकार, आपराधिक अपील आंशिक रूप से स्वीकार कर ली गई।

Case Title: Dr. Anand Rai vs State of Madhya Pradesh & Anr.

Case No.: Criminal Appeal arising out of SLP (Crl.) No. 10711 of 2025

Decision Date: February 10, 2026

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