चेन्नई में बुधवार को मद्रास हाईकोर्ट की बेंच में लंबी बहस के बाद एक अहम ट्रेडमार्क विवाद पर फैसला सुनाया गया। मामला था मशहूर अंतरराष्ट्रीय ब्रांड 7 – Eleven International LLC और भारतीय खाद्य कंपनी Ravi Foods Private Limited के बीच ‘Big Bite’ नाम के इस्तेमाल को लेकर।
न्यायमूर्ति एन. आनंद वेंकटेश की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 7-Eleven की अपील खारिज कर दी और रजिस्ट्रार के पुराने आदेश को बरकरार रखा।
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केस की पृष्ठभूमि
विवाद की शुरुआत तब हुई जब 7-Eleven ने ‘Big Bite’ नाम से खाद्य उत्पादों के लिए भारत में ट्रेडमार्क पंजीकरण का आवेदन किया। कंपनी का दावा था कि वह 1988 से इस नाम का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल कर रही है और कई देशों में इसका पंजीकरण भी है।
दूसरी ओर, भारतीय कंपनी (पहले ड्यूक्स कंज्यूमर केयर लिमिटेड, बाद में रवि फूड्स प्राइवेट लिमिटेड) ने 2004 से ‘Big Bite’ नाम से बिस्कुट, चॉकलेट और अन्य खाद्य उत्पाद बेचने का दावा किया।
ट्रेडमार्क रजिस्ट्रार ने 18 जुलाई 2014 के आदेश में भारतीय कंपनी के आवेदन को स्वीकार कर लिया और 7-Eleven का आवेदन खारिज कर दिया। इसी आदेश को चुनौती देते हुए दोनों अपीलें दायर की गई थीं ।
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7-Eleven की दलील
7-Eleven की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने अदालत में कहा कि कंपनी 1988 से ‘Big Bite’ का उपयोग कर रही है और उसका वैश्विक स्तर पर बड़ा नाम है।
उन्होंने दलील दी कि “ट्रेडमार्क कानून सिर्फ भारत में उपयोग तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा भी महत्वपूर्ण है।”
बेंच के सामने यह भी तर्क रखा गया कि इंटरनेट और वेबसाइट के माध्यम से भारतीय उपभोक्ता इस ब्रांड से परिचित थे, इसलिए इसे ‘ट्रांसबॉर्डर रेपुटेशन’ (सीमापार प्रतिष्ठा) का लाभ मिलना चाहिए।
भारतीय कंपनी का पक्ष
रवि फूड्स की ओर से वकील ने साफ कहा कि “सिर्फ विदेशी प्रसिद्धि काफी नहीं है। भारत में असली व्यापार और ग्राहक होना जरूरी है।”
उन्होंने बताया कि कंपनी 2004 से ‘Big Bite’ नाम से खुले तौर पर व्यापार कर रही है। दो दशकों में किसी उपभोक्ता ने भ्रम या शिकायत की बात नहीं उठाई।
उनका कहना था कि “अगर कोई विदेशी कंपनी भारत में व्यापार नहीं कर रही, तो वह स्थानीय कंपनी को रोक नहीं सकती।”
अदालत की प्रमुख टिप्पणियाँ
न्यायालय ने अपने फैसले में ट्रेडमार्क कानून की धारा 11(3) पर विशेष जोर दिया, जो ‘पासिंग ऑफ’ यानी किसी के व्यापारिक नाम से भ्रम पैदा करने के खतरे से जुड़ी है।
अदालत ने कहा कि पासिंग ऑफ का दावा तभी मजबूत होता है जब भारत में वास्तविक ‘गुडविल’ (व्यापारिक प्रतिष्ठा) साबित हो।
बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय Toyota Jidosha Kabushiki Kaisha Vs. Prius Auto Industries Ltd. का हवाला देते हुए कहा कि “ट्रेडमार्क का अधिकार क्षेत्रीय होता है। सिर्फ वैश्विक पहचान पर्याप्त नहीं है, जब तक भारत में ठोस ग्राहक आधार न हो।”
अदालत ने स्पष्ट कहा, “वेबसाइट या विदेशी विज्ञापन मात्र से भारत में व्यापारिक प्रतिष्ठा सिद्ध नहीं होती।”
यह भी रेखांकित किया गया कि 7-Eleven ने भारत में ‘Big Bite’ नाम से वास्तविक व्यापार नहीं किया।
अंतिम निर्णय
सभी तथ्यों और पूर्व न्यायिक मिसालों पर विचार करने के बाद अदालत ने माना कि रजिस्ट्रार का आदेश गलत नहीं था।
बेंच ने कहा कि भारतीय कंपनी 2004 से इस नाम का उपयोग कर रही है और उसके खिलाफ किसी वास्तविक भ्रम का प्रमाण नहीं है।
अदालत ने 7-Eleven की दोनों अपीलें खारिज कर दीं और 18 जुलाई 2014 का आदेश बरकरार रखा ।
इस तरह ‘Big Bite’ ट्रेडमार्क पर अधिकार भारतीय कंपनी के पक्ष में कायम रहा।
Case Title: 7 – Eleven International LLC vs. Deputy Registrar of Trade Marks & Ors.
Case No.: (T) CMA (TM) Nos. 110 & 157 of 2023
Decision Date: 11 February 2026










