ओडिशा हाईकोर्ट ने सरकारी आदेशों की अनदेखी को गंभीरता से लेते हुए उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ IAS अधिकारी के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। कोर्ट ने साफ कहा कि उसके निर्देशों का पालन न करना और दिए गए आश्वासन को तोड़ना अवमानना को और गंभीर बनाता है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला तपन कुमार पटनायक द्वारा दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है। पहले, 30 जुलाई 2025 को हाईकोर्ट ने एक रिट याचिका का निपटारा करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि याचिकाकर्ता की अभ्यावेदन पर आठ सप्ताह के भीतर निर्णय लिया जाए और उसका परिणाम लिखित रूप में बताया जाए।
Read also:- सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत: 'ग्रे रूटिंग' केस में पिंकी रानी समेत आरोपियों को अग्रिम जमानत
कोर्ट ने यह भी कहा था कि जरूरी दस्तावेज मांगे जा सकते हैं, लेकिन इसी बहाने अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं होगी।
याचिकाकर्ता का आरोप था कि तय समय सीमा के बावजूद कोई निर्णय नहीं लिया गया।
कोर्ट की टिप्पणियां
न्यायमूर्ति दिक्सित कृष्णा श्रिपाड ने सुनवाई के दौरान कहा कि 12 दिसंबर 2025 को सरकारी वकील ने यह भरोसा दिलाया था कि अगली तारीख तक आदेश का पालन कर लिया जाएगा। हालांकि, अगली सुनवाई तक भी कोई अनुपालन रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई।
अदालत ने टिप्पणी की,
“यह सिर्फ आदेश की अवहेलना नहीं है, बल्कि कोर्ट को दिए गए आश्वासन का भी उल्लंघन है। ऐसे मामलों में इसे गंभीर अवमानना माना जाएगा।”
कोर्ट का निर्णय
इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने एकमात्र अवमाननाकर्ता, उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त-सह-सचिव अरविंद अग्रवाल, IAS के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया। उन्हें 22 जनवरी 2026 को अदालत के समक्ष पेश करने को कहा गया है।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इससे पहले आदेश का पूरा पालन कर दिया जाता है और उसकी सूचना अदालत को दे दी जाती है, तो किसी भी तरह की जबरदस्ती की कार्रवाई नहीं की जाएगी।
अदालत ने निर्देश दिया कि इस आदेश की वेब कॉपी पर तुरंत अमल किया जाए।
Case Title: Tapan Kumar Pattanaik v. Arvind Agrawal, IAS
Case Number: CONTC No. 5546 of 2025
Date of Order: 16 January 2026










