सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पंजाब केसरी मीडिया ग्रुप को बड़ी अंतरिम राहत देते हुए पंजाब सरकार और राज्य एजेंसियों को निर्देश दिया कि लुधियाना स्थित प्रिंटिंग प्रेस के कामकाज में कोई बाधा न डाली जाए। कोर्ट ने साफ कहा कि अख़बार की छपाई रोकी नहीं जा सकती, और प्रेस को बिना रुकावट चलने दिया जाए।
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने तत्काल सुनवाई करते हुए पारित किया।
मामले की पृष्ठभूमि
मामला तब शुरू हुआ जब पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Punjab Pollution Control Board) के आदेश पर लुधियाना में पंजाब केसरी समूह की प्रिंटिंग यूनिट बंद कर दी गई। मीडिया ग्रुप का दावा है कि यह कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना और निशाना बनाकर की गई।
ग्रुप की ओर से कहा गया कि हाल के दिनों में सरकार के खिलाफ प्रकाशित खबरों के बाद उनके खिलाफ लगातार कदम उठाए गए-जिसमें प्रेस बंद करने के नोटिस, बिजली कटौती, होटल पर कार्रवाई और अन्य दबाव वाली कार्रवाइयों का आरोप शामिल है।
इसी मुद्दे पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में भी याचिकाएं दायर थीं, जहां सोमवार को सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था, लेकिन अंतरिम राहत नहीं मिली।
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सुप्रीम कोर्ट में तात्कालिक सुनवाई कैसे हुई
मंगलवार सुबह करीब 10:30 बजे मामले को “अत्यंत जरूरी” बताते हुए सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट में ओरल मेंशनिंग की। उनके साथ एडवोकेट महेश अग्रवाल भी मौजूद थे।
रोहतगी ने कोर्ट को बताया कि प्रिंटिंग प्रेस पिछले करीब 20 साल से चल रहा था, लेकिन इसे अचानक बंद करा दिया गया। उन्होंने कहा,
“हमने कुछ ऐसी रिपोर्टें प्रकाशित कीं जो सरकार को पसंद नहीं आईं, और दो दिनों के भीतर कार्रवाई शुरू हो गई।”
अदालत का अवलोकन
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट का रुख स्पष्ट नजर आया। CJI सूर्यकांत ने राज्य के पक्ष को सुनते हुए टिप्पणी की कि अख़बार की छपाई रोकना स्वीकार्य नहीं।
कोर्ट ने कहा, “कोई बात नहीं। अखबार को रोका नहीं जा सकता।”
पीठ ने यह भी संकेत दिया कि होटल जैसी दूसरी व्यावसायिक गतिविधियों पर राज्य के कदम अलग संदर्भ में देखे जा सकते हैं, लेकिन अख़बार की छपाई बंद करना गंभीर मामला है।
CJI ने सुनवाई के दौरान कहा, “अखबार वाला हिस्सा बंद न करें। होटल या दूसरे कमर्शियल एस्टैब्लिशमेंट… कुछ दिनों के लिए बंद किए जा सकते हैं। लेकिन अखबार को इजाज़त दें।”
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पंजाब सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) शादान फरासत ने दलील दी कि कार्रवाई कानून के अनुसार की गई है और यह “राजनीतिक बदले” वाली बात नहीं है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट का फैसला जल्द आने वाला है, इसलिए मामला प्रतीक्षा कर सकता है।
राज्य पक्ष ने यह भी कहा कि पूरे अख़बार को बंद नहीं किया गया, केवल एक यूनिट पर प्रदूषण संबंधी कारणों से कार्रवाई हुई है।
मीडिया ग्रुप की आपत्ति: ‘प्राकृतिक न्याय’ का उल्लंघन
पंजाब केसरी समूह ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया कि 15 जनवरी 2026 को निरीक्षण और सैंपल लेने के दिन ही तुरंत बंद करने का आदेश जारी कर दिया गया, जबकि रिपोर्ट का इंतजार तक नहीं किया गया।
याचिका में कहा गया कि सुनवाई का मौका नहीं दिया गया, और नियमों का पालन नहीं हुआ। समूह ने दलील दी कि इससे प्रेस की स्वतंत्रता पर डर का माहौल बनता है।
सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश में स्पष्ट निर्देश दिया कि ‘पंजाब केसरी’ की प्रिंटिंग प्रेस बिना रुकावट चलती रहेगी। साथ ही कोर्ट ने अन्य व्यावसायिक इकाइयों (जैसे होटल) को लेकर यथास्थिति (status quo) बनाए रखने को कहा।
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कोर्ट के आदेश में कहा गया: “बिना किसी पूर्वाग्रह के… यह निर्देश दिया जाता है कि पंजाब केसरी अखबार का प्रिंटिंग प्रेस बिना किसी रुकावट के काम करता रहेगा… यथास्थिति बनाए रखी जाएगी।”
यह अंतरिम व्यवस्था हाईकोर्ट के फैसले आने तक और उसके एक सप्ताह बाद तक लागू रहेगी, ताकि जरूरत पड़ने पर पक्ष आगे कानूनी विकल्प अपना सकें।
Case Title: Jagat Vijay Printers & The Hindu Samachar Limited vs State of Punjab
Decision Date: 21 January 2026 (Tuesday)










