दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को एनडीटीवी (NDTV) के संस्थापक प्रणय रॉय और राधिका रॉय को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ जारी आयकर पुनर्मूल्यांकन नोटिस रद्द कर दिए। अदालत ने कहा कि आयकर विभाग पहले से जांचे जा चुके मामले को दोबारा नहीं खोल सकता।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद मार्च 2016 में जारी उन नोटिसों से जुड़ा है, जिनमें आरआरपीआर होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड को दिए गए कथित ब्याज-मुक्त ऋणों पर सवाल उठाया गया था। आरआरपीआर, एनडीटीवी की प्रमोटर कंपनी है।
प्रणय और राधिका रॉय ने नवंबर 2017 में हाईकोर्ट का रुख किया था। उनका तर्क था कि इसी आकलन वर्ष के लिए आयकर विभाग पहले ही जुलाई 2011 में मामला खोल चुका था, जिसकी कार्यवाही मार्च 2013 में पुनर्मूल्यांकन आदेश के साथ समाप्त हो गई थी।
अदालत की टिप्पणियां
न्यायमूर्ति दिनेश मेहता और न्यायमूर्ति विनोद कुमार की खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों से सहमति जताई। अदालत ने कहा कि जब एक बार पुनर्मूल्यांकन शुरू हो जाता है, तो अधिकारी उस वर्ष की पूरी आय की जांच कर सकता है।
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पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा,
“पहले से पूरी हो चुकी कार्यवाही के बाद उसी मुद्दे पर दोबारा नोटिस जारी करना केवल राय में बदलाव है, जिसे कानून अनुमति नहीं देता।”
अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि आरआरपीआर होल्डिंग के खिलाफ इसी तरह की कार्यवाही पर पहले ही रोक लगी हुई है और सितंबर 2024 में एक अन्य पीठ ने कंपनी को जारी नोटिस रद्द कर दिया था।
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फैसला
हाईकोर्ट ने दोनों याचिकाएं स्वीकार करते हुए 31 मार्च 2016 के नोटिस और उनसे जुड़ी सभी कार्यवाहियों को रद्द कर दिया। साथ ही, आयकर विभाग पर ₹2 लाख का जुर्माना लगाया गया, जिसमें ₹1-₹1 लाख प्रणय रॉय और राधिका रॉय को दिए जाएंगे।
वरिष्ठ अधिवक्ता सचित जॉली, अधिवक्ता यियुष्टि रावत, देवांश जैन और सार्थक अबरोल के साथ प्रणय रॉय और राधिका रॉय की ओर से पेश हुए।
आयकर विभाग की ओर से अधिवक्ता एनपी साहनी, इंद्राज सिंह राय, संजीव मेनन, राहुल सिंह और गौरव कुमार ने प्रतिनिधित्व किया.










