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अंबरनाथ नगर परिषद में राजनीतिक घमासान: बॉम्बे हाईकोर्ट ने समितियों के गठन पर लगाई अंतरिम रोक

अंबरनाथ विकास अघाड़ी बनाम जिला कलेक्टर, अंबरनाथ नगर परिषद विवाद पर बॉम्बे हाईकोर्ट की रोक, बीजेपी-कांग्रेस गठबंधन पर सवाल, समिति गठन पर रोक, अगली सुनवाई सोमवार को।

Vivek G.
अंबरनाथ नगर परिषद में राजनीतिक घमासान: बॉम्बे हाईकोर्ट ने समितियों के गठन पर लगाई अंतरिम रोक

अंबरनाथ नगर परिषद में सत्ता की खींचतान अब अदालत तक पहुंच गई है। बीजेपी और कांग्रेस के अप्रत्याशित गठबंधन, फिर उससे अलगाव और दल-बदल के बीच बॉम्बे हाईकोर्ट ने शनिवार को अहम आदेश देते हुए नगर परिषद की विभिन्न विषय समितियों के गठन पर अस्थायी रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि जब तक स्थिति साफ नहीं होती, तब तक आगे की प्रक्रिया पर ब्रेक रहेगा।

कैसे शुरू हुआ विवाद

20 दिसंबर 2025 को हुए अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला।

  • शिंदे गुट की शिवसेना – 27 सीटें
  • बीजेपी – 14 सीटें
  • कांग्रेस – 12 सीटें
  • एनसीपी (अजित पवार गुट) – 4 सीटें
  • निर्दलीय – 2 सीटें

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बहुमत के लिए 31 सीटें जरूरी थीं। ऐसे में बीजेपी और कांग्रेस ने मिलकर, एनसीपी के चार और दो निर्दलीयों के समर्थन से ‘अंबरनाथ विकास आघाड़ी’ बनाई। जिला कलेक्टर ने 7 जनवरी 2026 को इसे प्री-पोल गठबंधन के रूप में मान्यता दे दी।

लेकिन इसके तुरंत बाद राजनीति ने करवट बदली। कांग्रेस ने अपने 12 पार्षदों को पार्टी से बाहर कर दिया, वहीं एनसीपी के चार पार्षद शिवसेना में शामिल हो गए। इसके बाद कलेक्टर ने पहले दिए गए आदेश को वापस लेते हुए नए गठबंधन को मान्यता दे दी।

अदालत की सख्त टिप्पणी

इस फैसले को चुनौती देते हुए अंबरनाथ विकास आघाड़ी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस अभय मंत्री की पीठ ने की।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एनसीपी के चार पार्षदों की भूमिका पर कड़ी टिप्पणी की।

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पीठ ने मौखिक रूप से कहा, “ये चारों पार्षद अवसरवादी हैं। पहले एक तरफ गए, फिर दूसरी ओर। इन्होंने पूरे लोकतांत्रिक ढांचे को उलझा दिया है।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि बार-बार पाला बदलने से लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित होती है और व्यवस्था मजाक बन जाती है।

याचिकाकर्ता की दलील

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गिरीश गोडबोले ने दलील दी कि
हाईकोर्ट की पांच जजों की पीठ पहले ही कह चुकी है कि चुनाव के बाद बना गठबंधन भी कई मामलों में प्री-पोल गठबंधन माना जा सकता है।

उन्होंने कहा कि कलेक्टर ने जल्दबाजी में पहले आदेश को वापस लिया और यह कानून के खिलाफ है।

अदालत का रुख

पीठ ने कहा कि इस मामले में दो ही रास्ते हैं-

  1. या तो कोर्ट खुद पूरे मामले की अंतिम सुनवाई करे,
  2. या फिर इसे दोबारा कलेक्टर के पास भेजा जाए ताकि वह तय करे कि असली प्री-पोल गठबंधन कौन सा है।

अदालत ने स्पष्ट किया,
“आसमान नहीं टूट पड़ेगा। फिलहाल सभी समितियों के गठन पर रोक रहेगी। सोमवार तक स्थिति स्पष्ट की जाएगी।”

इसके साथ ही कोर्ट ने सोमवार तक सभी प्रक्रियाओं पर रोक लगाते हुए मामले की सुनवाई स्थगित कर दी।

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कोर्ट का अंतिम आदेश (फिलहाल)

  • नगर परिषद की सभी विषय समितियों के गठन पर रोक
  • कलेक्टर के आदेश पर फिलहाल अमल नहीं
  • सोमवार को अगली सुनवाई
  • तब तय होगा कि मामला कलेक्टर को लौटाया जाए या कोर्ट खुद फैसला दे

Case Title: Ambernath Vikas Aghadi vs District Collector

Case Type: Writ Petition (Municipal Governance Dispute)

Decision Date: 11 January 2026

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