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किरायेदार को राहत: सुप्रीम कोर्ट ने कहा-समन के बिना खारिज नहीं हो सकती 'लीव टू डिफेंड' अर्जी

हरप्रीत सिंह बनाम परनीत सिंह सोही, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बिना समन की तामील के ‘लीव टू डिफेंड’ खारिज नहीं हो सकती। किरायेदार को राहत, मामला फिर Rent Controller को भेजा गया।

Vivek G.
किरायेदार को राहत: सुप्रीम कोर्ट ने कहा-समन के बिना खारिज नहीं हो सकती 'लीव टू डिफेंड' अर्जी

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में किरायेदारों के अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने साफ कहा कि अगर किसी मामले में समन विधिवत रूप से तामील नहीं हुए हों, तो केवल देरी के आधार पर ‘लीव टू डिफेंड’ की अर्जी खारिज नहीं की जा सकती। यह फैसला हरियाणा और पंजाब हाईकोर्ट के एक आदेश को पलटते हुए दिया गया है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला चंडीगढ़ स्थित एक संपत्ति से जुड़ा है। अपीलकर्ता हरप्रीत सिंह किरायेदार हैं, जबकि प्रतिवादी परनीत सिंह सोही मकान मालिक हैं।

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मकान मालिक ने Rent Controller के समक्ष बेदखली याचिका दायर की थी। किरायेदार की ओर से ‘लीव टू डिफेंड’ यानी अपना पक्ष रखने की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन यह अर्जी समय पर दाखिल न होने के कारण खारिज कर दी गई।

इसके बाद Rent Controller ने मकान खाली करने का आदेश पारित कर दिया। इस आदेश को चुनौती देते हुए किरायेदार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन वहां भी राहत नहीं मिली। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

कोर्ट की अहम टिप्पणी

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जे.के. महेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर शामिल थे, ने रिकॉर्ड का अवलोकन किया। अदालत ने पाया कि-

“यह एक असामान्य मामला है, जहां समन की विधिवत तामील ही नहीं हुई थी। ऐसे में केवल देरी के आधार पर लीव टू डिफेंड को खारिज करना उचित नहीं है।”

कोर्ट ने माना कि जब तक समन सही तरीके से सर्व नहीं हुए हों, तब तक किरायेदार को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।

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सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

सभी पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट और Rent Controller के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने मामला दोबारा Rent Controller को भेजते हुए निर्देश दिए कि-

  • किरायेदार की लीव टू डिफेंड अर्जी को मेरिट पर सुना जाए
  • दोनों पक्ष 23 जनवरी 2026 को Rent Controller के समक्ष उपस्थित हों
  • मामला एक महीने के भीतर तय किया जाए

हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है।

“हमने प्रार्थना-पत्र के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है। सभी दलीलें संबंधित पक्षों के लिए खुली रहेंगी,” पीठ ने स्पष्ट किया।

इसके साथ ही अपील का निपटारा कर दिया गया।

Case Title: Harpreet Singh vs Parneet Singh Sohi

Case No.: Civil Appeal arising out of SLP (C) No. 14128 of 2025

Decision Date: 06 January 2026

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