मेन्यू
समाचार खोजें...
होमSaved

नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की डूबकर मौत पर NGT ने स्वतः संज्ञान लिया, जलभराव में लापरवाही पर नोटिस जारी

नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की डूबकर मौत पर NGT ने स्वतः संज्ञान लिया, जलभराव और पर्यावरणीय लापरवाही पर नोटिस।

Shivam Y.
नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की डूबकर मौत पर NGT ने स्वतः संज्ञान लिया, जलभराव में लापरवाही पर नोटिस जारी

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने गुरुवार को नोएडा में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की दर्दनाक मौत के मामले में स्वतः (सुओ मोटो) संज्ञान लेते हुए गंभीर टिप्पणी की। अधिकरण ने जलभराव और प्रशासनिक निष्क्रियता से जुड़े इस मामले को पर्यावरण कानून के उल्लंघन से जुड़ा बताते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला टाइम्स ऑफ इंडिया में 20 जनवरी 2026 को प्रकाशित खबर “Noida CEO Removed, CM Orders SIT Probe into Techie’s Drowning” के आधार पर दर्ज किया गया। खबर के अनुसार, सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की सेक्टर-150, नोएडा में एक जलभराव वाले गड्ढे में गिरने से मौत हो गई थी। बताया गया कि घने कोहरे के कारण वह एक तेज मोड़ पर संतुलन खो बैठे और पानी से भरे ट्रेंच में गिर गए।

Read also:- पंजीकृत विक्रय विलेख को पुख्ता सबूत के बिना "फर्जी" घोषित नहीं किया जा सकता; पंजीकरण से प्रबल कानूनी मान्यता प्राप्त होती है: सर्वोच्च न्यायालय

जिस जमीन पर यह हादसा हुआ, वह पहले एक निजी मॉल परियोजना के लिए आवंटित थी, लेकिन पिछले लगभग दस वर्षों से आसपास की हाउसिंग सोसायटियों का बारिश और सीवर का पानी वहां जमा होता रहा, जिससे वह एक स्थायी तालाब में बदल गई।

अदालत की टिप्पणियां

मुख्य न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए. सेंथिल वेल की पीठ ने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि 2015 में सिंचाई विभाग ने स्टॉर्म वॉटर मैनेजमेंट योजना बनाई थी, लेकिन वह कागजों तक ही सीमित रह गई।

Read also:- दिल्ली हाईकोर्ट ने सहमति से बने रिश्ते को अपराध नहीं माना, बलात्कार व SC/ST एक्ट का FIR रद्द

पीठ ने कहा,

“प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट होता है कि समय पर सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, जिसके कारण गंभीर जलभराव की स्थिति बनी।”

अधिकरण ने यह भी नोट किया कि नियंत्रित निकासी व्यवस्था के अभाव में आसपास की कई सोसायटियों के बेसमेंट तक जलमग्न हो गए थे। पीठ के अनुसार, यह स्थिति न केवल पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन है, बल्कि इससे आम लोगों की जान को भी खतरा पैदा हुआ।

Read also:- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने L&T पर वायु प्रदूषण केस में समन रद्द किया, मजिस्ट्रेट को दोबारा फैसला करने का आदेश

NGT ने माना कि यह मामला पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के उल्लंघन की ओर संकेत करता है और इसमें पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन से जुड़े “गंभीर प्रश्न” उठते हैं।

निर्णय

अधिकरण ने नोएडा प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सिंचाई विभाग, पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव और गौतम बुद्ध नगर के जिलाधिकारी को पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी किया।

सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले शपथपत्र के माध्यम से अपना जवाब दाखिल करें। मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल 2026 को होगी।

More Stories