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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने L&T पर वायु प्रदूषण केस में समन रद्द किया, मजिस्ट्रेट को दोबारा फैसला करने का आदेश

यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बनाम लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वायु प्रदूषण मामले में L&T के खिलाफ समन रद्द कर दिया, पाया कि मजिस्ट्रेट ने वैध सहमति को नज़रअंदाज़ किया और नए सिरे से सुनवाई का आदेश दिया।

Vivek G.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने L&T पर वायु प्रदूषण केस में समन रद्द किया, मजिस्ट्रेट को दोबारा फैसला करने का आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने लार्सन एंड टूब्रो (L&T) और उसके वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ वायु प्रदूषण से जुड़े एक आपराधिक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पाया कि मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किया गया समन आदेश तथ्यात्मक गलती पर आधारित था। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने वह आदेश रद्द कर दिया और मामले को दोबारा विचार के लिए निचली अदालत को वापस भेज दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला वर्ष 2020 का है, जब उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एलएंडटी के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी। आरोप था कि कंपनी ने गाजियाबाद में बनाए गए बैचिंग प्लांट को बिना पूर्व अनुमति के संचालित किया और धूल नियंत्रण के पर्याप्त उपाय नहीं किए।

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यह प्लांट ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना से जुड़ा था, जिसके तहत एलएंडटी को निर्माण कार्य सौंपा गया था। कंपनी का कहना था कि उसने 1 अगस्त 2020 से 31 जुलाई 2022 तक वैध रूप से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति ली हुई थी।

कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं

एलएंडटी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि:

  • कंपनी के पास वैध ‘कंसेंट टू ऑपरेट’ मौजूद था
  • निरीक्षण रिपोर्ट मौके पर नहीं बनाई गई
  • समन जारी करते समय मजिस्ट्रेट ने दस्तावेज़ों पर सही तरीके से विचार नहीं किया
  • सभी निदेशकों को बिना भूमिका तय किए आरोपी बना दिया गया

वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कहा कि निरीक्षण में धूल नियंत्रण के उपाय नहीं मिले और यह एयर एक्ट के उल्लंघन का मामला है।

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अदालत की टिप्पणी

हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड देखने के बाद स्पष्ट कहा कि मजिस्ट्रेट ने यह मान लिया कि कंपनी के पास कोई वैध अनुमति नहीं थी, जबकि दस्तावेज़ कुछ और ही बताते हैं।

अदालत ने कहा:

“समन जारी करते समय यह मान लिया गया कि बिना अनुमति के यूनिट चल रही थी, जबकि रिकॉर्ड से यह तथ्य सही नहीं पाया गया।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल यह लिख देना कि ‘दस्तावेज़ देखे गए’ पर्याप्त नहीं है। मजिस्ट्रेट को यह स्पष्ट करना चाहिए था कि किन आधारों पर आरोप बनता है।

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कोर्ट का फैसला

हाईकोर्ट ने:

  • 19 फरवरी 2022 का समन आदेश रद्द कर दिया
  • मामले को संबंधित मजिस्ट्रेट के पास वापस भेज दिया
  • निर्देश दिया कि दोबारा सोच-समझकर और कानून के अनुसार निर्णय लिया जाए
  • यह भी कहा कि बिना अनावश्यक देरी के फैसला किया जाए

इसके साथ ही एलएंडटी और उसके निदेशकों को तत्काल राहत मिल गई।

Case Title: U.P. Pollution Control Board vs Larsen & Toubro Ltd.

Case No.: Application U/S 482 No. 221 of 2026

Decision Date: 16 January 2026

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