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होमबायर्स की दखल याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने टकशशिला प्रोजेक्ट को CIRP में भेजने का आदेश बरकरार रखा

एलेग्ना को-ऑप हाउसिंग सोसाइटी लिमिटेड बनाम एडलवाइस एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड, टकशशिला प्रोजेक्ट पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, CIRP को मंजूरी, होमबायर्स सोसाइटी की दखल याचिका खारिज।

Vivek G.
होमबायर्स की दखल याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने टकशशिला प्रोजेक्ट को CIRP में भेजने का आदेश बरकरार रखा

दिल्ली की ठंडी सुबह में जब कोर्टरूम नंबर में सुनवाई शुरू हुई, तो माहौल गंभीर था। एक तरफ सैकड़ों घर खरीदारों की उम्मीदें थीं, दूसरी तरफ बैंकों की बकाया रकम। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को Elegna Co-op Housing Society बनाम Edelweiss ARC मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए NCLAT के आदेश को सही ठहराया और टकशशिला हाइट्स प्रोजेक्ट को औपचारिक रूप से दिवालिया प्रक्रिया (CIRP) में भेजने की मंजूरी दे दी।

मामले की पृष्ठभूमि

अहमदाबाद स्थित “टकशशिला एलेग्ना” रेजिडेंशियल-कम-कमर्शियल प्रोजेक्ट के डेवलपर Takshashila Heights India Pvt. Ltd. ने साल 2018 में करीब 70 करोड़ रुपये का लोन लिया था। कोविड और निर्माण में देरी के बाद लोन चुकाने में परेशानी आई और खाता NPA हो गया।

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लोन बाद में Edelweiss Asset Reconstruction Company को ट्रांसफर हुआ। दोनों पक्षों में वन-टाइम सेटलमेंट की कोशिश भी हुई, लेकिन किस्तें समय पर न चुकने से समझौता टूट गया। इसके बाद Edelweiss ने दिवालियापन कानून के तहत NCLT में याचिका दायर की।

NCLT ने शुरुआत में यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि IBC का इस्तेमाल वसूली के औजार की तरह नहीं होना चाहिए। लेकिन NCLAT ने इस फैसले को पलटते हुए प्रोजेक्ट को CIRP में भेज दिया। इसी के खिलाफ डेवलपर और हाउसिंग सोसाइटी दोनों सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।

अदालत की टिप्पणियाँ

सुनवाई के दौरान सबसे बड़ा सवाल था-क्या प्रोजेक्ट को दिवालिया प्रक्रिया में भेजना सही है और क्या होमबायर्स की सोसाइटी को दखल देने का हक है?

कोर्ट ने साफ कहा कि IBC में सबसे अहम बात है कर्ज और चूक (debt & default)। अगर दोनों साबित हो जाते हैं, तो अदालत के पास ज्यादा विकल्प नहीं बचते।
पीठ ने टिप्पणी की,

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“कानून की मंशा यह है कि जहां कर्ज की चूक साफ दिखे, वहां दिवालिया प्रक्रिया को रोका नहीं जा सकता।”

होमबायर्स की ओर से दलील दी गई कि प्रोजेक्ट लगभग पूरा है और CIRP से खरीदारों को नुकसान होगा। इस पर कोर्ट ने माना कि खरीदारों की चिंता वाजिब है, लेकिन कानून की प्रक्रिया को भावनाओं के आधार पर नहीं बदला जा सकता।

इंटरवेंशन पर कोर्ट का रुख

Elegna Co-op Housing Society ने मांग की थी कि उसे केस में पक्षकार बनने दिया जाए क्योंकि वह 189 फ्लैट मालिकों का प्रतिनिधित्व करती है।

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने NCLAT से सहमति जताते हुए कहा कि सोसाइटी सीधे तौर पर लोन लेन-देन का हिस्सा नहीं है।
पीठ ने कहा,

“हर प्रभावित पक्ष को कार्यवाही में दखल का अधिकार नहीं होता। कानून यह तय करता है कि कौन सुना जाएगा और किस स्तर पर।”

कोर्ट ने यह भी साफ किया कि व्यक्तिगत होमबायर्स IBC में ‘फाइनेंशियल क्रेडिटर’ माने जाते हैं, लेकिन एक मेंटेनेंस सोसाइटी अपने आप में उसी हैसियत से हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

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फ़ैसला

करीब दो घंटे चली सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने दोनों अपीलें खारिज कर दीं।

  • NCLAT का आदेश बरकरार रहा।
  • Takshashila Heights India Pvt. Ltd. के खिलाफ Corporate Insolvency Resolution Process शुरू करने का रास्ता साफ हो गया।
  • Elegna Co-op Housing Society की दखल याचिका भी अंतिम रूप से खारिज कर दी गई।

फैसले के साथ ही कोर्ट ने साफ कर दिया कि दिवालियापन कानून का मकसद सिर्फ वसूली नहीं, बल्कि व्यवस्था बनाना है-लेकिन जब कर्ज की चूक साबित हो जाए, तो प्रक्रिया से बचा नहीं जा सकता।

Case Title: Elegna Co-op Housing Society Ltd. vs Edelweiss Asset Reconstruction Co. Ltd.

Case No.: Civil Appeal No. 10261 of 2025 & 10012 of 2025

Case Type: Insolvency / Corporate Law

Decision Date: 15 January 2026

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