सुप्रीम कोर्ट ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) को बड़ा झटका देते हुए केरल स्थित एक पेट्रोल पंप की ज़मीन खाली करने का आदेश दिया है। अदालत ने साफ कहा कि कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि उसने तय तारीख से पहले निर्माण किया था, इसलिए उसे कानूनी संरक्षण नहीं मिल सकता।
यह मामला करीब तीन दशक पुराना है, जिसकी शुरुआत 1994 में हुई थी और अब जाकर इसका अंतिम निपटारा हुआ है।
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मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद केरल के एर्नाकुलम जिले की एक ज़मीन को लेकर है। वर्ष 1966 में इस ज़मीन को इंडियन ऑयल को पेट्रोल पंप चलाने के लिए लीज़ पर दिया गया था।
बाद में ज़मीन मालिक पी.सी. सथियादेवन ने 1994 में अदालत का रुख करते हुए कब्ज़ा वापस मांगा। उनका कहना था कि लीज़ की अवधि पूरी हो चुकी है और कंपनी को अब ज़मीन खाली करनी चाहिए।
इंडियन ऑयल ने दावा किया कि उसने 20 मई 1967 से पहले इस ज़मीन पर निर्माण कर लिया था, इसलिए उसे केरल भूमि सुधार अधिनियम, 1963 की धारा 106 के तहत संरक्षण मिलना चाहिए।
कानून क्या कहता है?
धारा 106 के अनुसार,
अगर कोई किरायेदार 20 मई 1967 से पहले किसी ज़मीन पर व्यावसायिक या औद्योगिक निर्माण कर चुका हो, तो उसे बेदखल नहीं किया जा सकता।
हालांकि, इसके लिए निर्माण की तारीख का ठोस सबूत होना ज़रूरी है।
केरल हाईकोर्ट ने 2010 में इंडियन ऑयल के दावे को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि कंपनी यह साबित नहीं कर पाई कि निर्माण 20 मई 1967 से पहले हुआ था।
इसके बाद इंडियन ऑयल ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।
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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस आलोक अराधे शामिल थे, ने हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया।
अदालत ने कहा:
“रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेज़ यह साबित नहीं करते कि अपीलकर्ता ने तय तारीख से पहले निर्माण किया था।”
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि धारा 106 का लाभ तभी मिलेगा जब दोनों शर्तें पूरी हों -
- लीज़ व्यावसायिक उद्देश्य के लिए हो
- निर्माण 20 मई 1967 से पहले हुआ हो
इंडियन ऑयल इन दोनों में से दूसरी शर्त साबित नहीं कर सका।
अंतिम फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने अपील खारिज करते हुए आदेश दिया कि-
- इंडियन ऑयल को 6 महीने के भीतर ज़मीन खाली करनी होगी
- कंपनी को कोई तीसरा पक्ष शामिल करने की अनुमति नहीं होगी
- बकाया किराया, अगर कोई हो, तो चुकाना होगा
- एक अधिकृत अधिकारी को हलफनामा दाखिल करना होगा कि आदेश का पालन किया जाएगा
कोर्ट ने यह भी कहा कि मामला 1994 से लंबित है और अब ज़मीन मालिक को और इंतज़ार नहीं कराया जा सकता।
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निष्कर्ष
करीब 30 साल पुराने इस विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि कानूनी संरक्षण के लिए सिर्फ दावा नहीं, बल्कि ठोस सबूत ज़रूरी होते हैं। अब इंडियन ऑयल को तय समयसीमा में पेट्रोल पंप खाली कर ज़मीन मालिक को सौंपनी होगी।
Case Title: Indian Oil Corporation Ltd. vs P.C. Sathiyadevan (D) by LRs
Case No.: Civil Appeal No. 8576 of 2011
Decision Date: 21 जनवरी 2026









