सुप्रीम कोर्ट ने एक ट्रांसफर याचिका की सुनवाई के दौरान पति-पत्नी के बीच चल रहे वैवाहिक विवाद में बच्चे के भविष्य को सबसे अहम मानते हुए अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने साफ कहा कि बच्चे का हित किसी भी कानूनी लड़ाई से ऊपर है। मामले में दोनों पक्ष दुबई में काम कर रहे हैं, जबकि उनकी दस साल की बेटी भारत में रह रही है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला Transfer Petition (Civil) No. 1239/2024 से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ता अमिता नौटियाल ने अपने पति प्रदीप कुमार बलूनी के खिलाफ याचिका दायर की थी।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि पति-पत्नी दोनों दुबई में नौकरी कर रहे हैं, लेकिन उनकी नाबालिग बेटी लखनऊ में ननिहाल में रहकर पढ़ाई कर रही है। तकनीकी रूप से बच्ची मां की कस्टडी में है, लेकिन व्यावहारिक रूप से वह माता-पिता से दूर रह रही है।
कोर्ट की टिप्पणी
पीठ ने इस व्यवस्था पर नाराज़गी जताई।
कोर्ट ने कहा,
“बच्चे को माता-पिता के साथ रहने का अधिकार है और दुबई में शिक्षा की सुविधाएं बेहतर हैं।”
न्यायालय ने यह भी पूछा कि क्या पिता बच्ची को अपने साथ दुबई में रखने को तैयार हैं। इस पर पति की ओर से सकारात्मक जवाब दिया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बच्चे की भलाई को प्राथमिकता देना दोनों माता-पिता की जिम्मेदारी है।
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मध्यस्थता का आदेश
कोर्ट ने विवाद को सुलझाने के लिए दोनों पक्षों को सुप्रीम कोर्ट मेडिएशन सेंटर भेज दिया।
दोनों को 28 जनवरी 2026 को वर्चुअल माध्यम से मध्यस्थ के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया गया है। इसके बाद मध्यस्थ यह तय करेगा कि आगे की कार्यवाही ऑनलाइन होगी या व्यक्तिगत रूप से।
मध्यस्थ को दो महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है।
भरण-पोषण पर निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने पति को निर्देश दिया कि वह निचली अदालत द्वारा तय की गई पूरी भरण-पोषण राशि दो सप्ताह के भीतर पत्नी के बैंक खाते में जमा करे।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले किसी अदालत में जमा की गई राशि इससे अलग मानी जाएगी।
साथ ही, 8 मई 2024 को दिया गया अंतरिम आदेश अगली सुनवाई तक लागू रहेगा। मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल 2026 को होगी।
Case Title: Amita Nautiyal vs Pradeep Kumar Balooni
Case No.: Transfer Petition (Civil) No. 1239/2024
Decision Date: 19 January 2026










