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वक्फ ट्रिब्यूनल की सीमा पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, साधारण निषेधाज्ञा याचिका पर अहम टिप्पणी

हबीब अल्लादीन और अन्य बनाम मोहम्मद अहमद, सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ ट्रिब्यूनल की सीमा स्पष्ट करते हुए कहा कि बिना अधिसूचना के किसी संपत्ति को वक्फ नहीं माना जा सकता।

Vivek G.
वक्फ ट्रिब्यूनल की सीमा पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, साधारण निषेधाज्ञा याचिका पर अहम टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून से जुड़े एक अहम मामले में यह साफ कर दिया है कि वक्फ ट्रिब्यूनल की सीमा असीमित नहीं है और हर प्रकार का विवाद उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक किसी संपत्ति को कानूनन वक्फ घोषित नहीं किया गया हो, तब तक केवल पूजा या उपयोग के आधार पर ट्रिब्यूनल का अधिकार स्वतः नहीं बन जाता।

यह मामला Habib Alladin & Others बनाम Mohammed Ahmed से जुड़ा है, जिसमें एक आवासीय इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर बने कथित मस्जिद को लेकर विवाद था।

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मामला क्या था?

अपीलकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने एक भूमि पर आवासीय भवन बनवाया था। उसी इमारत के एक हिस्से को बाद में मस्जिद के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा। प्रतिवादी का दावा था कि वहां वर्षों से नमाज़ अदा की जा रही है और यह “वक्फ बाय यूज़र” है।

जब इस स्थान पर प्रवेश रोका गया, तो प्रतिवादी ने वक्फ ट्रिब्यूनल में स्थायी निषेधाज्ञा (Permanent Injunction) की याचिका दायर की।
वहीं, अपीलकर्ताओं ने कहा कि:

  • यह संपत्ति कभी वक्फ के रूप में अधिसूचित नहीं हुई
  • न ही वक्फ बोर्ड में पंजीकृत है
  • इसलिए ट्रिब्यूनल को मामला सुनने का अधिकार ही नहीं है

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सुप्रीम कोर्ट की प्रमुख टिप्पणी

न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने विस्तार से वक्फ अधिनियम, 1995 की धाराओं की व्याख्या करते हुए कहा-

  • वक्फ ट्रिब्यूनल का अधिकार केवल उन्हीं संपत्तियों तक सीमित है जो वक्फ के रूप में अधिसूचित या पंजीकृत हों।
  • केवल यह कह देना कि कोई स्थान धार्मिक उपयोग में है, उसे वक्फ नहीं बना देता।
  • जब तक संपत्ति वक्फ सूची (Section 5) या रजिस्टर (Section 37) में दर्ज न हो, तब तक ट्रिब्यूनल अधिकार क्षेत्र ग्रहण नहीं कर सकता।
  • ऐसे मामलों में सिविल कोर्ट ही उचित मंच होता है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि
Section 83 of Wakf Act को इस तरह नहीं पढ़ा जा सकता कि वह हर तरह के विवाद को अपने भीतर समेट ले।

पुराने फैसलों पर अदालत की टिप्पणी

कोर्ट ने अपने निर्णय में Ramesh Gobindram, Anis Fatma Begum, Rashid Wali Beg जैसे कई पुराने फैसलों का विश्लेषण किया और स्पष्ट किया कि-

  • वक्फ ट्रिब्यूनल की शक्तियां सीमित हैं
  • सिविल कोर्ट का अधिकार पूरी तरह समाप्त नहीं होता
  • केवल वही विवाद ट्रिब्यूनल सुनेगा जो कानून में स्पष्ट रूप से सौंपे गए हों

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अंतिम निर्णय

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि-

  • जब कोई संपत्ति वक्फ घोषित नहीं है
  • और न ही वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड में दर्ज है
  • तो केवल उपयोग के आधार पर उसे वक्फ नहीं माना जा सकता
  • ऐसे मामलों में ट्रिब्यूनल नहीं, सिविल कोर्ट ही सक्षम मंच है

इसी आधार पर अदालत ने निचली अदालत और हाईकोर्ट के आदेश को पलटते हुए अपील स्वीकार कर ली।

Case Title: Habib Alladin & Ors. vs Mohammed Ahmed

Case No.: Civil Appeal arising out of SLP (C) No. 2937 of 2022

Decision Date: 28 January 2026

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