मणिपुर में जातीय हिंसा के बाद विस्थापित लोगों के लिए बनाए गए राहत शिविरों की स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। सोमवार को शीर्ष अदालत ने जस्टिस गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति से कहा कि वह राहत शिविरों में सुविधाओं की कमी से जुड़े आरोपों की जांच कर जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपे।
यह मामला चुराचांदपुर जिले के 14 राहत शिविरों से जुड़ा है, जहां रह रहे लोगों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठाए गए थे।
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मामला कैसे शुरू हुआ
याचिकाकर्ता एंथनी नौलाक ने मणिपुर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि राहत शिविरों में भोजन, चिकित्सा, स्वच्छता और अन्य जरूरी सुविधाओं की भारी कमी है।
उन्होंने दावा किया कि उन्होंने खुद कई शिविरों का दौरा किया और इसके बाद 28 जुलाई 2025 को राज्य प्रशासन को एक विस्तृत शिकायत सौंपी।
हालांकि, मणिपुर हाईकोर्ट ने यह कहते हुए याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया कि इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट पहले से विचार कर रहा है और एक समिति भी गठित है। इसके बाद याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्या बागची भी शामिल थे, ने मामले की सुनवाई की।
अदालत ने रिकॉर्ड पर कहा कि-
“हाईकोर्ट ने इस आधार पर हस्तक्षेप से इनकार किया कि यह मामला पहले से इस न्यायालय के समक्ष लंबित है और एक तीन सदस्यीय समिति इस पर काम कर रही है।”
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि समिति दिल्ली में बैठकर रिपोर्ट तैयार कर रही है, जिससे जमीनी हालात तक उसकी सीधी पहुंच नहीं हो पा रही। साथ ही यह भी कहा गया कि राहत शिविरों में भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं और साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाएं बेहद खराब स्थिति में हैं।
राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता की शिकायत पहले ही जस्टिस गीता मित्तल समिति को भेजी जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि समिति ने मणिपुर के कई इलाकों का दौरा किया है और समय-समय पर सुप्रीम कोर्ट को स्थिति रिपोर्ट भी सौंपी जा रही है।
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कोर्ट का आदेश
दोनों पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि-
“तीन सदस्यीय समिति, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस गीता मित्तल कर रही हैं, राहत शिविरों में कथित कमियों की जांच करे और यथाशीघ्र, संभव हो तो दो महीने के भीतर, अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंपे।”
इसके साथ ही कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए सभी लंबित अंतरिम आवेदनों को भी समाप्त कर दिया।
Case Title: Anthony Naulak vs District Commissioner, Churachandpur
Case No.: SLP (C) No. 1458 of 2026
Decision Date: 19 January 2026










