प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री से जुड़े बयान पर दर्ज आपराधिक मानहानि मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने संजय सिंह से अलग ट्रायल की मांग की थी।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद अप्रैल 2023 की दो प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ा है। केजरीवाल ने 1 अप्रैल और संजय सिंह ने 2 अप्रैल को बयान दिए थे। गुजरात विश्वविद्यालय का कहना है कि इन टिप्पणियों से उसकी छवि को नुकसान पहुंचा। इसके बाद विश्वविद्यालय ने अहमदाबाद की मजिस्ट्रेट कोर्ट में दोनों नेताओं के खिलाफ आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई।
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केजरीवाल की ओर से कहा गया कि दोनों घटनाएं अलग-अलग तारीखों पर हुईं, दोनों के सोशल मीडिया हैंडल भी अलग हैं और आरोपों का स्वरूप भी अलग है। इसलिए संयुक्त सुनवाई न्याय के हित में नहीं होगी।
हालांकि, सेशंस कोर्ट पहले ही इस तर्क को नहीं मान चुका था। वहां अदालत ने कहा था कि दोनों नेताओं की कार्रवाई एक ही क्रम में और एक साझा उद्देश्य के तहत हुई दिखती है।
कोर्ट की अहम टिप्पणी
मंगलवार को न्यायमूर्ति एम. आर. मेंगडेय ने आदेश सुनाते हुए कहा, “यह आवेदन खारिज किया जाता है।”
अदालत ने माना कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 223 के तहत एक ही लेन-देन में हुए अपराधों के लिए संयुक्त ट्रायल किया जा सकता है। सेशंस कोर्ट की टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा गया कि अगर “एक ही उद्देश्य से निरंतर कार्रवाई” हो, तो उसे एक ही लेन-देन माना जाता है।
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अब क्या हुआ
हाईकोर्ट ने केजरीवाल की वह चुनौती भी खारिज कर दी, जो उन्होंने सेशंस कोर्ट के 15 दिसंबर 2025 के आदेश के खिलाफ दायर की थी। इसके साथ ही, संजय सिंह के साथ संयुक्त ट्रायल जारी रखने का रास्ता साफ हो गया।
Case Title: Arvind Kejriwal vs State of Gujarat & Anr.
Case No.: R/SCR.A/17143/2025
Decision Date: January 13, 2026










