टेलीकॉम सेक्टर से जुड़े एक गंभीर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अवैध कॉल रूटिंग यानी ग्रे रूटिंग के आरोपों का सामना कर रहे पिंकी रानी और अन्य आरोपियों को शीर्ष अदालत ने बड़ी राहत देते हुए अग्रिम जमानत दे दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच में सहयोग करने के बाद आरोपियों की हिरासत जरूरी नहीं पाई गई।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला महाराष्ट्र के नवी मुंबई स्थित राबले एमआईडीसी पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, अप्रैल से जुलाई 2024 के बीच दूरसंचार विभाग को शिकायतें मिली थीं कि कई अंतरराष्ट्रीय कॉल भारतीय लोकल कॉल की तरह दिखाई दे रही हैं।
जांच में सामने आया कि इन कॉल्स को SIP तकनीक के ज़रिए भारत के भीतर लोकल कॉल की तरह दिखाया जा रहा था। इस प्रक्रिया को तकनीकी भाषा में ‘ग्रे रूटिंग’ कहा जाता है, जिससे सरकार को भारी राजस्व नुकसान होता है।
जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया कि
- M/s Humanity Path Pvt. Ltd.
- M/s Srivansh Consulting Pvt. Ltd. और M/s Web Werks
के माध्यम से यह अवैध नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। आरोप है कि करीब 1000 मोबाइल नंबरों और सर्वर सिस्टम के ज़रिए विदेशी कॉल्स को घरेलू कॉल की तरह रूट किया गया, जिससे ₹5 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ।
कोर्ट की कार्यवाही और दलीलें
इस मामले में पिंकी रानी और अन्य आरोपी कंपनी के निदेशक हैं। निचली अदालत और बॉम्बे हाईकोर्ट ने पहले उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
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हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि-
- कोर्ट द्वारा दी गई अंतरिम सुरक्षा के बाद आरोपी जांच अधिकारी के समक्ष पेश हुए
- उन्होंने पूछताछ में पूरा सहयोग किया
- जांच एजेंसी कोई नया ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी
राज्य सरकार ने दलील दी कि “बड़े नेटवर्क और साजिश का खुलासा करने के लिए कस्टोडियल इंटरोगेशन जरूरी है।”
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने राज्य की दलील को खारिज करते हुए कहा:
“जब आरोपी पहले ही जांच में सहयोग कर चुके हैं और कोई नया गंभीर तथ्य सामने नहीं आया है, तो हिरासत की जरूरत नहीं बनती।”
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि-
- आरोपी जब भी बुलाए जाएं, जांच में शामिल होंगे
- यदि वे सहयोग नहीं करते, तो राज्य सरकार जमानत रद्द कराने के लिए स्वतंत्र होगी
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अदालत का अंतिम फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने:
- अंतरिम संरक्षण को स्थायी कर दिया
- आरोपियों को अग्रिम जमानत देने का आदेश दिया
- जांच एजेंसी को शर्तों के साथ पूछताछ की छूट दी
- सभी लंबित याचिकाओं का निपटारा कर दिया
यह आदेश 12 जनवरी 2026 को पारित किया गया।
Case Title: Pinky Rani & Ors. vs State of Maharashtra
Case No.: SLP (Crl.) Nos. 16470–16471 of 2025
Decision Date: 12 January 2026










