केरल हाईकोर्ट ने केरल हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन (KHCAA) के 2026 के चुनावों को चुनौती देने वाली एक याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने साफ कहा कि बार एसोसिएशन के चुनाव निजी प्रकृति के होते हैं और उन्हें संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका के माध्यम से चुनौती नहीं दी जा सकती
मामले की पृष्ठभूमि
यह याचिका वरिष्ठ अधिवक्ता संगीत लक्षणा ने स्वयं पक्षकार (पार्टी-इन-पर्सन) के रूप में दायर की थी। उन्होंने 1 दिसंबर 2025 को जारी चुनाव अधिसूचना, मतदाता सूची और 16 दिसंबर 2025 को हुए KHCAA चुनावों की वैधता पर सवाल उठाए थे।
याचिकाकर्ता का आरोप था कि चुनाव प्रक्रिया में कई गंभीर अनियमितताएं हुईं। उनके अनुसार, न तो समय पर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की गई और न ही आपत्तियों पर कोई जवाब दिया गया। इसके बावजूद चुनाव करा दिए गए और 17 दिसंबर 2025 को परिणाम घोषित कर दिए गए।
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि चूंकि चुनाव हाईकोर्ट परिसर के ऑडिटोरियम में, हाईकोर्ट की अनुमति और सुविधाओं का उपयोग कर हुए, इसलिए यह मामला सार्वजनिक कानून के दायरे में आता है।
अदालत की मुख्य टिप्पणियां
न्यायमूर्ति बेच्चू कुरियन थॉमस ने मामले की सुनवाई के दौरान सबसे पहले याचिका की maintainability यानी स्वीकार्यता पर विचार किया।
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अदालत ने कहा कि KHCAA एक पंजीकृत संस्था है, जो Travancore-Cochin Literary, Scientific and Charitable Societies Registration Act, 1955 के तहत पंजीकृत है और उसका कामकाज मुख्य रूप से अपने सदस्यों तक सीमित है।
अदालत ने टिप्पणी की,
“केवल इस कारण कि किसी एसोसिएशन के सदस्य बड़ी संख्या में हैं, उसे सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं माना जा सकता।”
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट परिसर में चुनाव कराने की अनुमति या औपचारिक कार्यक्रमों में बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों की भागीदारी से उसे कोई सार्वजनिक दायित्व नहीं मिल जाता।
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न्यायालय ने कहा,
“ये सभी कार्य केवल अनुमति पर आधारित हैं, इन्हें किसी वैधानिक अधिकार या सार्वजनिक कर्तव्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।”
इसके अलावा, अदालत ने दिल्ली, कलकत्ता और बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि बार एसोसिएशन के चुनाव विवाद आमतौर पर निजी विवाद होते हैं, जिनके लिए उपयुक्त उपाय सिविल कोर्ट में उपलब्ध है, न कि रिट याचिका में।
अदालत का निर्णय
इन सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद केरल हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि KHCAA के चुनावों को रिट याचिका के जरिए चुनौती नहीं दी जा सकती।
अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए यह भी जोड़ा कि याचिकाकर्ता को कानून के तहत उपलब्ध अन्य उपयुक्त मंचों पर अपनी शिकायत उठाने की स्वतंत्रता रहेगी।
Case Title: Sangeetha Lakshmana v. Registrar General, High Court of Kerala & Others
Case Number: W.P.(C) No. 302 of 2026
Date of Judgment: 20 January 2026









