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चार साल से ज्यादा जेल में बंद आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से राहत, NDPS केस में नियमित जमानत मंजूर

रेजिनामरी चेल्लामणि बनाम राज्य (सीमा शुल्क विभाग), सुप्रीम कोर्ट ने NDPS केस में 4 साल से ज्यादा जेल में बंद आरोपी रेजिनामेरी चेल्लामणि को नियमित जमानत दी, ट्रायल कोर्ट्स को भी अहम निर्देश।

Vivek G.
चार साल से ज्यादा जेल में बंद आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से राहत, NDPS केस में नियमित जमानत मंजूर

नई दिल्ली में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के दौरान एक अहम आपराधिक अपील पर सुनवाई हुई। मामला मादक पदार्थ तस्करी से जुड़ा था, लेकिन चर्चा का केंद्र बना आरोपी का लंबा समय से जेल में रहना। अदालत ने कहा कि कानून सख्त हो सकता है, लेकिन इंसाफ को समय के साथ संतुलित रहना चाहिए।

मामले की पृष्ठभूमि

अपीलकर्ता रेजिनामेरी चेल्लामणि को NDPS अधिनियम और कस्टम्स एक्ट के तहत दर्ज एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। आरोप था कि उनके पास से प्रतिबंधित मादक पदार्थ बरामद हुआ, जिसकी मात्रा वाणिज्यिक (commercial) श्रेणी से अधिक थी।

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मद्रास हाईकोर्ट ने 24 जुलाई 2025 को उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। यह मामला Case R.R. No. 41/2021 (C.C. No. 225/2022) से जुड़ा है, जिसकी सुनवाई चेन्नई की विशेष NDPS अदालत में लंबित है।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने रिकॉर्ड देखा और पाया कि अपीलकर्ता 4 साल, 1 महीना और 28 दिन से न्यायिक हिरासत में हैं। अदालत के सामने यह तथ्य भी रखा गया कि उसी फ्लाइट से यात्रा कर रहे एक सह-आरोपी को पहले ही सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है।

पीठ ने इस स्थिति को महत्वपूर्ण मानते हुए कहा कि समान परिस्थितियों में अलग-अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता।

अदालत की टिप्पणी

पीठ ने सुनवाई के दौरान साफ शब्दों में कहा,

“लंबे समय तक कारावास और समान स्थिति वाले सह-आरोपी को मिली राहत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”

अदालत ने यह भी नोट किया कि शुरुआती दौर में अपीलकर्ता ने गवाहों से जिरह नहीं की थी, क्योंकि उनके पास निजी वकील नहीं था। बाद में जब उन्होंने अपना वकील किया, तब पुनः जिरह की अनुमति दी गई।

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ट्रायल कोर्ट्स को अहम निर्देश

इस आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने केवल जमानत तक खुद को सीमित नहीं रखा। अदालत ने देश भर की ट्रायल कोर्ट्स को एक स्पष्ट संदेश दिया।

पीठ ने कहा कि हर आपराधिक मामले में ट्रायल कोर्ट का यह दायित्व है कि वह आरोपी को उसके कानूनी प्रतिनिधित्व के अधिकार की जानकारी दे। यदि आरोपी वकील नहीं कर सकता, तो उसे लीगल एड का विकल्प बताया जाए और यह पूरी प्रक्रिया आदेश में दर्ज की जाए।

अदालत ने निर्देश दिया कि यह आदेश सभी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को भेजा जाए, ताकि इसे सख्ती से लागू किया जा सके।

अंतिम निर्णय

सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए अपील स्वीकार कर ली। अदालत ने निर्देश दिया कि अपीलकर्ता को कड़ी शर्तों पर नियमित जमानत दी जाए, जिनका निर्धारण ट्रायल कोर्ट करेगा।

साथ ही, अपीलकर्ता को अपना पासपोर्ट ट्रायल कोर्ट में जमा करने, सुनवाई में सहयोग करने और अनावश्यक स्थगन न लेने के निर्देश भी दिए गए। ट्रायल कोर्ट से कहा गया कि वह मामले का निपटारा यथाशीघ्र करने का प्रयास करे।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत देते समय मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है और यह आदेश केवल जमानत तक सीमित है।

Case Title: Reginamary Chellamani vs State (Customs Department)

Case No.: Criminal Appeal arising out of SLP (Crl.) No. 18886/2025

Decision Date: 05 February 2026

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