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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बांके बिहारी मंदिर दर्शन समय विवाद में अवमानना याचिका खारिज की

गौरव गोस्वामी बनाम न्यायमूर्ति अशोक कुमार (सेवानिवृत्त) और अन्य, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बांके बिहारी मंदिर दर्शन समय बढ़ाने से जुड़ी अवमानना याचिका खारिज की, सुप्रीम कोर्ट समिति के फैसले को सही ठहराया।

Vivek G.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बांके बिहारी मंदिर दर्शन समय विवाद में अवमानना याचिका खारिज की

वृंदावन स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर के दर्शन समय को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने आया। इस बार मामला अदालत की अवमानना से जुड़ा था। याचिकाकर्ता का आरोप था कि पहले से पारित न्यायिक आदेश के बावजूद दर्शन समय बढ़ाया गया, जो अदालत की अवहेलना है। लेकिन कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला Contempt Application (Civil) No. 5608 of 2025 के रूप में दायर हुआ था। याचिकाकर्ता गौरव गोस्वामी ने आरोप लगाया कि वर्ष 2022 में जनहित याचिका में पारित आदेश के बावजूद मंदिर के दर्शन समय में बदलाव किया गया।

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दरअसल, 28 नवंबर 2022 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मथुरा के सिविल जज (जूनियर डिवीजन) द्वारा 14 नवंबर 2022 को पारित उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें मंदिर का दर्शन समय बढ़ाया गया था। इसके बाद भी, याचिकाकर्ता के अनुसार, उसी तरह का निर्णय दोबारा लिया गया।

सुप्रीम कोर्ट की भूमिका

कोर्ट के समक्ष यह तथ्य भी रखा गया कि बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। वहां 8 अगस्त 2025 को शीर्ष अदालत ने मंदिर के प्रबंधन में लंबे समय से चले आ रहे प्रशासनिक गतिरोध और आपसी विवादों को देखते हुए एक हाई-पावर्ड टेंपल मैनेजमेंट कमेटी गठित की।

इस समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अशोक कुमार को सौंपी गई। समिति को मंदिर के भीतर और बाहर की रोज़मर्रा की व्यवस्थाओं की निगरानी और संचालन की जिम्मेदारी दी गई।

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दर्शन समय बढ़ाने का फैसला

रिकॉर्ड के अनुसार, समिति की बैठक 11 सितंबर 2025 को हुई। बैठक के एजेंडा नंबर 7 में दर्शन समय बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया। चर्चा के बाद समिति ने दर्शन समय बढ़ाने का निर्णय लिया, जिसे 19 सितंबर 2025 को जिला मजिस्ट्रेट, मथुरा द्वारा कार्यालय ज्ञापन के जरिए लागू किया गया।

याचिकाकर्ता का कहना था कि यह फैसला हाईकोर्ट के पुराने आदेश के विपरीत है और समिति को ऐसा करने का अधिकार नहीं था।

अदालत की टिप्पणियां

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि यह देखना जरूरी है कि क्या वास्तव में कोर्ट के आदेश की जानबूझकर अवहेलना हुई है।

अदालत ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति को मंदिर के अंदर और बाहर के दिन-प्रतिदिन के संचालन की निगरानी का स्पष्ट अधिकार दिया गया है।”

कोर्ट ने यह भी माना कि दर्शन समय बढ़ाने का निर्णय तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ और उन्हें हो रही कठिनाइयों को ध्यान में रखकर लिया गया।

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कोर्ट का अंतिम निर्णय

हाईकोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि 28 नवंबर 2022 के आदेश का उल्लंघन नहीं हुआ है। समिति सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत काम कर रही थी और उसका उद्देश्य श्रद्धालुओं की सुविधा सुनिश्चित करना था।

अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि अवमानना का कोई मामला नहीं बनता।
इसके साथ ही अवमानना याचिका को खारिज कर दिया गया।

Case Title: Gaurav Goswami vs. Justice Ashok Kumar (Retd.) & Others

Case No.: Contempt Application (Civil) No. 5608 of 2025

Decision Date: 22 January 2026

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