सुप्रीम कोर्ट ने आर्थिक अपराध से जुड़े एक अहम मामले में स्पष्ट किया है कि केवल पैसे जमा न करने के आधार पर किसी आरोपी की जमानत याचिका को टालना उचित नहीं है। अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वह राकेश जैन की नियमित जमानत याचिका पर कानून के अनुसार जल्द फैसला करे। यह टिप्पणी सब्सिडी घोटाले से जुड़े एक मामले में की गई है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला वर्ष 2019 का है, जब दिल्ली की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने प्रगत अक्षय ऊर्जा लिमिटेड के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। आरोप था कि कंपनी ने करीब ₹4.10 करोड़ की सरकारी सब्सिडी का दुरुपयोग किया।
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कंपनी के निदेशक राकेश जैन को 12 दिसंबर 2019 को गिरफ्तार किया गया था। बाद में कंपनी की ओर से करीब ₹2.17 करोड़ जमा कराए गए, जिसके आधार पर दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दी थी। हालांकि शेष राशि जमा न होने के कारण हाईकोर्ट ने जुलाई 2025 में उनकी अंतरिम जमानत बढ़ाने से इनकार कर दिया।
कोर्ट की अहम टिप्पणियां
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि-
“केवल इसलिए कि आरोपी किसी राशि को जमा नहीं कर सका, उसकी जमानत याचिका को लंबित रखना सही नहीं है।”
कोर्ट ने यह भी कहा कि:
• आरोपी सिर्फ कंपनी का निदेशक है
• उसकी व्यक्तिगत भूमिका अभी साबित होनी बाकी है
• जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल हो चुकी है
• ऐसे मामलों में जमानत को पैसे से जोड़ना न्यायसंगत नहीं
पीठ ने अपने पहले के फैसले गजानन दत्तात्रेय गोरे बनाम महाराष्ट्र राज्य का हवाला देते हुए कहा कि जमानत को आर्थिक शर्तों से जोड़ना गलत परंपरा है।
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सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि-
• राकेश जैन की नियमित जमानत याचिका पर
• तीन सप्ताह के भीतर
• कानूनी आधार पर फैसला किया जाए,
• न कि केवल रकम जमा न होने के आधार पर।
तब तक आरोपी को मिली अंतरिम राहत जारी रहेगी।
Case Title: Rakesh Jain vs State
Case No.: Criminal Appeal No. 378/2026
Decision Date: 21 January 2026

