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RTE प्रवेश पर राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: प्री-प्राइमरी और कक्षा 1 दोनों स्तरों पर 25% सीटें अनिवार्य

रुक्मणी बिरला मॉडर्न हाई स्कूल और अन्य बनाम राजस्थान राज्य और अन्य - राजस्थान उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि प्री-स्कूल स्तर पर 25% आरटीई कोटा लागू होता है, और कक्षा I तक प्रवेश सीमित करने वाले राज्य के दिशानिर्देशों को रद्द कर दिया है।

Shivam Y.
RTE प्रवेश पर राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: प्री-प्राइमरी और कक्षा 1 दोनों स्तरों पर 25% सीटें अनिवार्य

जयपुर में राजस्थान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में गुरुवार को शिक्षा से जुड़ा एक बेहद अहम मामला अपने निष्कर्ष पर पहुंचा। अदालत खचाखच भरी रही। एक ओर सामाजिक संगठन थे, जो कमजोर वर्ग के बच्चों के हक की बात कर रहे थे, तो दूसरी ओर राज्य सरकार और निजी स्कूलों की लंबी कतार थी। मुद्दा था क्या RTE कानून के तहत 25% आरक्षण सिर्फ कक्षा 1 तक सीमित किया जा सकता है?

मामला कैसे शुरू हुआ

यह विवाद तब खड़ा हुआ जब राजस्थान सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2020–21 से दिशानिर्देश जारी कर RTE के तहत प्रवेश को केवल कक्षा 1 तक सीमित कर दिया।

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प्री-प्राइमरी (नर्सरी, PP3+, PP4+, PP5+) में निजी स्कूलों को फीस लेकर बच्चों को प्रवेश देने की छूट रही, लेकिन कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए RTE को वहां लागू नहीं किया गया।

इस फैसले को सामाजिक संगठनों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। उनका तर्क था कि यह RTE Act, 2009 और संविधान के अनुच्छेद 21A के खिलाफ है।

अदालत के सामने मुख्य सवाल था- क्या राज्य सरकार को यह अधिकार है कि वह RTE के तहत प्रवेश का “एंट्री लेवल” खुद तय करे और प्री-प्राइमरी स्तर को इससे बाहर कर दे?

अदालत की अहम टिप्पणियां

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायमूर्ति बलजिंदर सिंह संधू की पीठ ने साफ शब्दों में कहा कि RTE कानून की मंशा को सीमित नहीं किया जा सकता।

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पीठ ने टिप्पणी की,

RTE अधिनियम की धारा 12(1)(c) और उसका प्रावधान स्पष्ट है। यदि कोई स्कूल प्री-स्कूल शिक्षा देता है, तो वहां भी 25 प्रतिशत सीटें कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित होंगी।”

अदालत ने यह भी कहा कि राज्य सरकार को केवल RTE के क्रियान्वयन के लिए दिशानिर्देश बनाने का सीमित अधिकार है, कानून की मूल भावना बदलने का नहीं।

बेंच ने इस नीति को संवैधानिक समानता (Article 14) के खिलाफ माना। अदालत के अनुसार,

“ऐसा नहीं हो सकता कि सक्षम परिवारों के बच्चे प्री-प्राइमरी में पढ़ें और कमजोर वर्ग के बच्चों को वहां से बाहर रखा जाए।”

अदालत ने इसे बच्चों के बीच “अनुचित वर्गीकरण” बताया।

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स्कूलों की दलील

निजी स्कूलों की ओर से कहा गया कि प्री-प्राइमरी शिक्षा RTE के दायरे में नहीं आती और सरकार से उचित प्रतिपूर्ति (reimbursement) की व्यवस्था भी स्पष्ट नहीं है।

हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि भरपाई का मुद्दा बच्चों के मौलिक अधिकार से बड़ा नहीं हो सकता।

कोर्ट का अंतिम फैसला

राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने विस्तृत फैसले में कहा:

  • RTE अधिनियम के तहत 25% आरक्षण सिर्फ कक्षा 1 तक सीमित नहीं किया जा सकता
  • जो स्कूल प्री-प्राइमरी शिक्षा देते हैं, उन्हें वहां भी RTE के तहत प्रवेश देना होगा
  • राज्य सरकार की वे गाइडलाइंस जो प्री-प्राइमरी को RTE से बाहर करती हैं, कानून के अनुरूप नहीं हैं
  • एकल न्यायाधीश के फैसले को बरकरार रखते हुए अधिकांश विशेष अपीलें खारिज कर दी गईं

फैसला सुनाते हुए पीठ ने कहा कि शिक्षा का अधिकार केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि हर स्तर पर समान रूप से लागू होना चाहिए।

Case Title:- Rukmani Birla Modern High School & Ors. vs State of Rajasthan & Ors.

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